
यह यूफोर्बियेसी कुल का नन्हा-सा एक वर्षीय शाकीय पौधा है। इसका वानस्पतिक नाम ‘यूफोर्बिया थाइमिफोलिया’ है, जो:यूफोरेबियेसी कुल का पौधा है। यह नम स्थानों और इमारतों की दीवारों के सहारे उगता है। यह घर की बगिया/ बगीचे और बागों में घास के साथ उगता पाया जाता है। पौधा श्यान होता है। पत्तियाँ गहरी हरी, छोटी अण्डाकार और सम्मुख होती है। तना गोल पतला, कोमल और रक्ताभ होता है। पौधे से श्वेत दूधिया पदार्थ दूध(लैटेक्स) पाया जाता है।
औषधीय उपयोग- अपने देश में जनजातियों और ग्रामीणों द्वारा इस पौधे को दूब के साथ पीसकर इसका रस गर्भाशय के रोगों और श्वेतप्रदर के उपचार में प्रयोग में लिया जाता है। त्वचा रोग में इसकी पत्तियों को घिसकर लगाया जाता है। इसका रस का दस्त और पेचिश रोग में दिया जाता है। यह कृमिनाशी है। यह कफ और अस्थमा के लिए उत्तम औषधि है। यह एक विषाणु रोधी(एण्टीवायरल) औषधि भी है।





















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