कार्यक्रम

श्रीधाम वृन्दावन में भक्ति ही सर्वोपरि है : डॉ. सहदेव कृष्ण चतुर्वेदी

धूमधाम से सम्पन्न हुआ भक्ति मन्दिर का 26 वां पाटोत्सव

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।चैतन्य विहार-पापड़ी चौराहा स्थित भक्ति मन्दिर का 26 वां पाटोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम से सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम प्रात: काल भक्ति महारानी की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक करके उनका वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन किया गया। तत्पश्चात विश्व शांति हेतु वृहद महायज्ञ सम्पन्न हुआ। जिसमें वेदज्ञ विप्रों व देश के विभिन्न प्रांतों से आए सैकड़ों भक्तों व श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं।
भक्ति मन्दिर के सेवायत आचार्य डॉ. सहदेव कृष्ण चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीधाम वृन्दावन में भक्ति सर्वोपरि है। साथ ही यहां उसी की महत्ता है। इसीलिए हमारे पूज्य पिताश्री स्व. डॉ. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी ने यहां भक्ति मन्दिर की स्थापना की। श्रीधाम वृन्दावन का यह भक्ति मन्दिर विश्व का एकमात्र ऐसा मन्दिर है जहां पर कि भक्ति महारानी मूर्तिमान स्वरूप में विराजित हैं।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे पूर्व विधायक राजकुमार रावत ने कहा कि भक्ति मन्दिर अत्यंत सिद्ध व चमत्कारिक मन्दिर है। यहां आने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामना निश्चित ही पूर्ण होती है। इसीलिए यहां देश-विदेश के असंख्य श्रद्धालु आते रहते हैं।
विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रज भूमि भक्ति की वो दिव्य भूमि है, जहां अनपढ़ गोपियों की दृढ़ भक्ति ने ब्रह्मज्ञानी उद्धव के ज्ञान के घमंड को चूर-चूर कर दिया था। इसीलिए ब्रजभूमि में प्रभु के तमाम भक्त हुए हैं।
महोत्सव में जिलाधिकारी कार्यालय के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी हरदेव कृष्ण चतुर्वेदी, भक्ति मन्दिर के प्रबन्धक आनंद कुमार चौबे, नारायण चतुर्वेदी, आशीष चतुर्वेदी, गोविंद शरण रावत, मेघश्याम रावत (मोनू भैया), आनंद कुमार चौबे, धुव्र चतुर्वेदी, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, पृथु चतुर्वेदी आदि की उपस्थिति विशेष रही। संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।महोत्सव का समापन संत-ब्रजवासी-वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारे के साथ हुआ।

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