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श्रीधाम वृन्दावन की रज के कण-कण में विद्यमान हैं श्रीराधा-कृष्ण : महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज

धूमधाम से संपन्न हुआ श्रीब्रजधाम आश्रम का त्रिदिवसीय 14वां वार्षिकोत्सव

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।वाराहघाट/परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीब्रजधाम आश्रम में मानव सेवा ट्रस्ट (रजि.) मुंबई के द्वारा श्रीब्रज धाम आश्रम का 14 वां मंगलमय त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानन्द महाराज के पावन सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर आयोजित संत-विद्वत सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीब्रजधाम आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानन्द महाराज ने कहा कि श्रीधाम वृन्दावन की रज के कण-कण में श्रीराधा-कृष्ण विद्यमान हैं।इसीलिए यहां की रज भी मस्तक पर धारण की जाती है।इस रज को मस्तक पर धारण करने से प्रेम भक्ति सहज ही में प्राप्त हो जाती है।
चिंतामणि कुंज के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी आदित्यानंद गिरि महाराज एवं महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री महाराज ने कहा कि संत, वृक्ष, नदी, गिरि एवं धरणी ये अपनी लिए नही जीते हैं।इनकी उत्पत्ति केवल और केवल परहित और कल्याण के लिए हुई है।महामंडलेश्वर स्वामी अनन्तानंद महाराज ऐसे ही भगवदनिष्ठ संत हैं,जिन्होंने अपना समूचा जीवन प्रभु भक्ति, धर्म प्रचार एवं समाजसेवा के लिए पूर्णतः समर्पित किया हुआ है।
प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं ब्रज भूमि कल्याण परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष पण्डित बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि मानव सेवा ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानन्द महाराज धर्म व अध्यात्म जगत के जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं।उनके द्वारा समूचे विश्व में प्राचीन भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति का जो प्रचार-प्रसार किया जा रहा है,वो अति प्रशंसनीय है।
संत-विद्वत सम्मेलन में महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद सरस्वती महाराज (डॉ. अधिकारी गुरूजी), सिंहपौर हनुमान मंदिर के महंत सुंदर दास महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी बाल योगेश्वरानंद महाराज, ‘भागवत भ्रमर’ आचार्य बद्रीश महाराज, पण्डित सौरभ गौड़, सर्वेश्वर शरण शास्त्री, पूर्व वरिष्ठ महाप्रबंधक शरद शर्मा, डॉ. रंजन कुमार वधवा ( वरिष्ठ मुख्य चिकित्साधिकारी, सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली), अनुपम कुमार मिश्र (सिटी मजिस्ट्रेट, मथुरा), आचार्य विपिन बापू, साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, बाल व्यास ध्रुव शर्मा, सन्त प्रियाशरण भक्तमाली, महामंडलेश्वर स्वामी सुबोधानंद महाराज, पूज्य महाराजश्री के परम् कृपापात्र (उत्तराधिकारी) स्वामी दीप्तानंद महाराज, आश्रम के प्रबन्धक निरंजन आदि के अलावा देश के विभिन्न प्रांतों से आए तमाम सन्त और भक्त-श्रद्धालु उपस्थित रहे।संचालन स्वामी प्रेमानंद महाराज ने किया।
महोत्सव के अंतर्गत महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानन्द महाराज ने सभी संतों, विद्वानों एवं अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।तत्पश्चात संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारा आदि के कार्यक्रम भी संपन्न हुए।

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