(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)
वृन्दावन।रमणरेती-परिक्रमा मार्ग स्थित प्राचीन वन विहार (आचार्य पीठ टोपी कुंज) में अनंतश्री विभूषित जगद्गुरू निंबार्काचार्य श्रीमन्मुकुंद देवाचार्य सेवा समिति चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) के द्वारा द्वादश दिवसीय जगद्गुरू श्रीनिंबार्काचार्य श्रीमन्मुकुंद देवाचार्य पाटोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ चल रहा है।जिसके अंतर्गत आचार्य पीठ-टोपी कुंज के अध्यक्ष जगदगुरू श्रीनिंबार्काचार्य श्रीश्रीललिताशरण देवाचार्य महाराज की अध्यक्षता में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन विश्वविख्यात “भागवत भास्कर” कृष्ण चन्द्र शास्त्री ठाकुरजी महाराज ने अपनी सुमधुर वाणी के द्वारा समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि पृथ्वी पर जब-जब पाप और अधर्म बढ़ने लगता है तथा धर्म की हानि होती है, तब-तब अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक परब्रह्म परमेश्वर भगवान नारायण किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पाप और अधर्म का नाश करते हैं।साथ ही धर्म की पुनः स्थापना करके भक्तों के सभी संकटों को हर लेते हैं।द्वापर युग में जब मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से ब्रजभूमि त्रस्त हो गई थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेकर कंस का अंत किया।साथ ही ब्रजवासियों को पापी राजा के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।इसीलिए वे ब्रजवासियों के प्राण प्रिय हैं।
श्रद्धेय ठाकुरजी महाराज ने कहा कि द्वापर में पृथ्वी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर उन ऋषियों, मुनियों व तपस्वियों की मनोकामनाओं को पूर्ण किया, जिन्होंने युगों-युगों से प्रभु को पाने के लिए कठोर तप व कठिन भगवद साधना की थी।उन ऋषियों, मुनियों व तपस्वियों ने भी अपनी कठोर तप व भगवद साधना के फलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण के समकालीन गोप-गोपियों और भगवान के सखाओं के रूप में जन्म लिया।
कथा में “यूपी रत्न” डॉक्टर गोपाल चतुर्वेदी ने ब्रज साहित्य सेवा मंडल के द्वारा श्री ललिता शरण देवाचार्य महाराज एवं भागवत भास्कर कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर जी का शॉल उढ़ाकर व ठाकुरजी का पटका, प्रसादी, माला आदि भेंट कर सम्मान किया।
महोत्सव में भागवताचार्य रामनिवास शास्त्री, महावीर शरण शास्त्री, आचार्य हरिहर मुद्गल, डॉ. राजेश सूद, श्याम सुन्दर शर्मा आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।




















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