श्रद्धांजली

याद रहेंगी, हिन्दी फिल्मों की ममतामयी माँ सुलोचना

डॉ.बचन सिंह सिकरवार
भारतीय फिल्मों विशेष रूप से हिन्दी/मराठी फिल्मों में हीरोइन/अभिनेत्री का विशेष महत्त्व/ आकर्षण होता है, लेकिन चरित्र अभिनेत्री के रूप में कई अभिनेत्रियों ने करुणा, दया,वात्सल्य, ममता और ममत्त्व से ओतप्रोत माँ की जीवन्त भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों के मन-मस्तिष्क पर अपनी स्वतंत्र तथा अमिट छाप भी छोड़ी हैं, इनमें दुर्गा खोटे, रूबी मेयर्स (सुलोचना) अचला सचदेव, निरूपा रॉय, ललिता पवार, सुलोचन लाटकर, कामिनी कौशल, दीना पाठक, नूतन आदि प्रमुख हैं। इस श्रृंखला की एक कड़ी सुलोचना लाटकर का गत 4जून को मुम्बई में 94 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। अपने 65 से अधिक के मराठी और हिन्दी फिल्मों के सफर में सुलोचना ने अपने अभिनय की जिन ऊँचाइयों को छूकर सफलता के जो प्रतिमान स्थापित किये हैं, उनसे उन्होंने अमृत्व को पा लिया है। सुलोचना लाटकर ने कोई डेढ़ दशक तक फिल्मों में हीरोइन की मुख्य भूमिकाएँ कीं। इसके बाद सन् 1959 से वे हिन्दी फिल्मों में माँ की भूमिका करने लगीं, इसकी शुरुआत हिन्दी फिल्म ‘दिल देके देखों’ से हुई। इस फिल्म में शम्मी कपूर और आशा पारिख की नई-नई जोड़ी थी। सुलोचना भी नई-नई माँ बनी थी,किन्तु बेहतरीन अभिनय के बूते अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहीं। इस नयी भूमिका में वह इतनी रम की गईं कि हर अभिनेता उनमें अपनी माँ खोजने लगा। फिल्मों में माँ के रूप में उनका अभिनय देखकर यह लगता ही नहीं था कि वह असली माँ हैं या बस उसका अभिनय कर रही हैं। यही कारण है कि अपने समय के सबसे लोकप्रिय अभिनेता भी उन्हें अपनी माँ के रूप में देखना चाहते थे, इनमें अभिनय सम्राट कहे जाने वाले दिलीप कुमार, रोमांटिक हीरो देवानन्द, शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार, सुनील दत्त, भारत कुमार मनोज कुमार, और सदी के नायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन भी शामिल हैं। ओ.पी.रल्हन निर्देशित फिल्म ‘तलाश’ में ये राजेन्द्र कुमार की माँ बनी थीं, उसमें माँ बेटे की परस्पर को जैसे दर्शाया गया है, वह दर्शकों को बेहद भावुक कर देता है। कमोबेश यही स्थिति उनकी सभी फिल्मों में रही।
सुलोचना लाटकर सिर्फ नाम से सुलोचना यानी सुन्दर लोचन/आँखों/नेत्र वाली नहीं थी, वरन् यथार्थ में उनकी आँखें सुन्दर और बड़ी-बड़ी भावपूर्ण थीं,जिनके माध्यम से वात्सल्य प्रेम बिखेरती रहीं। उन्होंने कोई 50 मराठी और 250 हिन्दी फिल्मों में अभिनय किया था। उनका फिल्मी सफर सन् 1942से शुरू हुआ और उनकी अन्तिम फिल्म ‘परीक्षा’ थी।
सुलोचना का जन्म 30 जुलाई, सन्1928 को कर्नाटक राज्य के बेलगाँव जिले के चिकादी तालुक के गाँव खादाकलता में हुआ था। जहाँ उनकी अभिनय यात्रा कम उम्र में शुरू हो गई थी, वहीं उनका विवाह भी सिर्फ 14वर्ष की अवस्था में मुथुरामन से हुआ। उनकी पुत्री कंचन का विवाह मराठी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता काशीनाथ घाणेकर से हुआ है, जिनका 56 साल की उम्र में देहान्त हो गया। उनकी एक बेटी है रश्मि घाणेकर।
सुलोचना जी की प्रमुख फिल्मों में जीवाचा सखा-मराठी(1948), वहिंनींच्या वांग्डया(1953), अब दिल्ली दूर नहीं(1957),सांग्त्ये ऐका-मराठी(1959),दिल देके देखो (1959),सुजाता (1959),सम्पूर्ण रामायण(1961) में कैकेयी, बंदिनी (1963), मराठा तितुका मेलवावा-मराठी (1965) में जीजाबाई, साधी माणसं-मराठी (1965), आदमी (1968), संघर्ष (1968),सरस्वती चन्द्र (1968), साजन(1968), खून भरी माँग (1988), मैं सुन्दर हूँ(1970)में महमूद की माँ, काला धन्धा गोरे लोग (1986),सती अनुसूइया, जब प्यार किसी से होता है, आए दिन बहार के, जानी मेरा नाम, गोरा और काला ,देवर, तलाश,कटी पतंग,मेरे जीवन साथी, प्रेमनगर,जानी दुश्मन, हीरा, मुक्ति, आजाद, गुलामी, नई रोशनी, सती अनुसूइया, जौहर महमूद इन गोवा, आशा, प्रेम गीत, दोस्ताना, कोरा कागज, हिम्मत वाला, जीत, नागिन, रईस, कहानी किस्मत आदि हैं जिनमें हीरोइन या माँ का अभिनय किया। इनकी पारिजात, मीठा भाकर,मोल करीण, एकटी, धाकटी जाऊ,पायदली पडलेली फुले,मांझ घर, माझी माणसं सासुरवास,धाकटी जाऊ चर्चित मराठी फिल्में हैं। इनमें उस समय के प्रख्यात मराठी फिल्मों के निर्देशकों ने उन्हें निर्देशित किया था। इनमें कई फिल्म में ये मुख्य भूमिका यानी हीरोइन थीं। सुलोचना जी जिन कलाकारों की माँ की भूमिका निभायी, उनसे उनके आत्मीय सम्बन्ध बन गए। इसे उनके द्वारा अमिताभ बच्चन के 75वें जन्म दिवस पर यह पत्र लिखा था,जिसे पढ़कर वह भावुक हो गए। सुलोचना जी ने पत्र में लिखा,‘‘ मेरे प्यारे चिरंजीवी अमित जी। आज आप 75 साल के हो गए हो। मराठी में इस खास दिन को ‘अमृत महोत्सव’ कहते हैं। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि अपनी जिन्दगी में यू ही ‘अमृतधारा बरसाते रहें।’’ मालूम हो, अमिताभ बच्चन की ‘मुकद्द का सिकन्दर’, ‘मजबूर’, ‘रेशमा और शेरा’ जैसी फिल्मों में सुलोचना माँ की भूमिका अभिनीत की थी। मराठी और हिन्दी फिल्मों के अतुलनीय योगदान के लिए सन् 1999में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। फिर सन् 2003में सुलोचना को मराठी सिनेमा में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए आधुनिक मराठी सिनेमा के संस्थापकों में से एक बाबूराव पेढरकर की जयन्ती के अवसर पर अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामण्डल द्वारा संस्थापित ‘चित्र भूषण’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2004 में उन्हें फिल्म जगत् में योगदान के ‘फिल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेण्ट अवार्ड’ से नवाजा गया। तत्पश्चात् सन् 2009 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा सुलोचना जी को ‘महाराष्ट्र भूषण’ से सम्मानित किया गया। उन्हें सन् 2010में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया। इनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दअपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके फिल्मी सफर कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। इनके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिन्दे समेत फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र, अमिताभ बच्चन समेत अनेक फिल्मी कलाकारों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी हैं।
अब सुलोचना जी इस दुनिया में भले ही नहीं हैं, पर हिन्दी/मराठी फिल्मों में अभिनेत्री तथा माँ की अद्भुत अपूर्व भूमिकाओं के लिए उन्हें सदैव याद किया जाता रहेगा।
सम्पर्क-डॉ.बचन सिंह सिकरवार 63ब, गाँधी नगर, आगरा-282003मो.नम्बर-9411684054

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