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वृन्दावन। श्याम वाटिका क्षेत्र स्थित अलि नागरि कुंज के भागवत मन्दिर में अष्ट दिवसीय श्रीमद्भागवत जयंती अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर आयोजित सन्त-विद्वत संगोष्ठी में राम नगर कॉलोनी स्थित शरणागति आश्रम के महंत फट्टी बाबा महाराज व बिहारी दास भक्तमाली ने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण व वांगम्य स्वरूप है। इस ग्रंथ को पंचम वेद माना गया है। इसमें समस्त वेदों व उपनिषदों का सार संग्रहित है।
“अलि नागरि कुंज” के सेवायत आचार्य पं. रामनिवास शुक्ल ने कहा कि श्रीमद्भागवत जीवन को मंगलमय बनाने वाला ग्रन्थ है। हम लोग जिस किसी भी कामना से इस ग्रंथ का आश्रय लेते हैं वह कामना निश्चित ही पूरी हो जाती है।
ब्रज सेवा संस्थान के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि “अलि नागरि कुंज” के पूर्वाचार्य स्वर्गीय पंडित बालगोविंद जी महाराज श्रीमद्भागवत के प्रकाण्ड विद्वान थे। उन्होंने बगैर किसी से धन लिए इस ग्रन्थ का प्रचार-प्रसार किया। सैकड़ों निःशुल्क भागवत कथाएँ कीं और सैकड़ों विद्यार्थियों को इसकी निःशुल्क शिक्षा प्रदान की।
रासाचार्य स्वामी कुंजबिहारी शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भागवत ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का समुच्चय है। यह सभी पुराणों में सर्वोपरि है। इसीलिए इसे “श्रीमद” शब्द से अलंकृत किया गया है।
प्रख्यात संगीताचार्य पं. मनमोहन शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भागवत मानव जीवन को भागवद्परायण बनाने वाला ग्रन्थ है। इससे परम् सत्य की अनुभूति होती है। इसका श्रवण, मनन और चिंतन भक्ति प्रदाता है। साथ ही यह भगवत्प्राप्ति का साधन है।
इस अवसर पर युवा साहित्यकार राधाकांत शर्मा, विद्यानिधि शुक्ला, राधे-राधे बाबा, क्षमा शुक्ला, अमरनाथ गोयल एवं राकेश गोयल आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।भागवत जयंती महोत्सव के अंतर्गत श्रीमद्भागवत ग्रन्थ का सप्त दिवससीय पारायण,अखण्ड महामंत्र संकीर्तन, भजन संध्या एवं सन्त-ब्रजवासी-वैष्णव सेवा हुई। संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।

डॉ. गोपाल चतुर्वेदी

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