कार्यक्रम

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण – महेन्द्र जी

मखदूम गांव में संगोष्ठी का आयोजन

मखदूम (फरह) मथुरा 28 दिसबर।भा.कृ.अनु.प. -केन्द्र्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, द्वारा मखदूम गांव में ‘‘भारत के नागरिकों का मौलिक कर्तव्य एवं राष्ट्र विकास में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व ‘‘में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाजसेवी एवं विचारक श्री महेन्द्र जी मुख्य अतिथि ने कहा कि संविधान का जीवन में महत्व एवं और मौलिक कर्तव्य एवं वर्तमान परिवेश में उनकी प्रांसगिता पर अपने विचार प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न भाषायें, धर्मजाति, रंग-रूप इत्यादि होने के बावजूद 72 वर्षो से भारत लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में वैश्विक पटल पर अपनी छवि सुदृढ़ रहने में सफल रहा है।

विचारक श्री महेन्द्र जी का स्वागत करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान डॉ. अनुपम कृष्ण दीक्षित, डॉ. बी.राय

इसके साथ संस्थान के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भारतीय संविधान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया तथा यह दुनिया के सभी संविधानों को परखने के बाद बनाया गया। इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए उनके संरक्षण के प्रतिनागरिकों के कर्तव्यों से अवगत कराया। सतत् कृषि एवं पशुपालन करके किसान भाई-बहन अपनी आजीविका में वृद्धि कर सकते हैं। मातृभूमि के प्रति कर्तव्यों, समर्पण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के निर्माण के लिए सभी को अपनी-अपनी क्षमतानुसार योगदान देना चाहिए।

इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक एवं मुख्य अतिथि द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के चित्र परमाल्यार्पण किया गया।

कार्यक्रम का संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापित डॉ. अनुपम कृष्ण दीक्षित, नोडल आफिसर ने किया।

इस अवसर परसंस्थान के प्रधान वैज्ञानिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी अधिकारी, रिसर्च एसोसिएट, एस.आर.एफ. एवंम खदूमगांव के निवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

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