कार्यक्रम

ब्रह्मलीन स्वामी गोकुलानंद महाराज के त्रिदिवसीय तिरोभाव महोत्सव

वृन्दावन। छटीकरा रोड स्थित कपिल कुटीर सांख्य योग आश्रम में चल रहे ब्रह्मलीन स्वामी गोकुलानंद महाराज के त्रिदिवसीय तिरोभाव महोत्सव के अंतर्गत हुए मुख्य महोत्सव में उनकी प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक महामंडलेश्वर साध्वी राधिका राधिका पुरी (जटा वाली मां) के अलावा अनेक संतों-विप्रो व भक्तों-श्रद्धालुओं के द्वारा किया गया।
साथ ही उनका वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन किया गया।
महोत्सव में “कोविड-19” की समाप्ति एवं विश्व कल्याणार्थ चल रहे वृहद त्रिदिवसीय अखंड महायज्ञ में अनेक संतो,विप्रों एवं भक्तों आदि के द्वारा पूर्णाहुति डाली गई। साथ ही प्रभु से लोकमंगल की कामना की गई।
तिरोभाव महोत्सव के अंतर्गत कोलकाता से आये प्रख्यात आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर लगाया गया। जिसमें 1000 से भी अधिक रोगियों का परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क औषधि उपलब्ध कराई गई।
साथ ही “महामंत्र” का अखण्ड हरिनाम संकीर्तन वैष्णवों द्वारा संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य किया गया। भजन संध्या भी हुई। जिसमें कई ख्याति नामा भजन मण्डलियों के द्वारा राधा-कृष्ण की महिमा से ओत-प्रोत भजनों का गायन कर सभी को भाव-विभोर कर दिया गया।
महोत्सव के समन्वयक डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी गोकुलानंद महाराज अत्यंत सेवा भावी सन्त थे। उनके रोम-रोम में सेवा के परमाणु व्याप्त थे। उन्होंने आजीवन नर सेवा को नारायण सेवा माना। अतः उनकी जीवन शैली के अनुरूप ही कपिल कुटीर सांख्य योग आश्रम में विभिन्न सेवा प्रकल्प यथासमय आयोजित किए जाते रहते हैं।
महामंडलेश्वर साध्वी राधिका साधिका पुरी (जटा वाली माँ) ने महामंडलेश्वरों, महंतों एवं विद्वानों का स्मृति-चिन्ह देकर स्वागत-सत्कार किया। साथ ही सन्तों,विप्रों,निर्धनों व निराश्रितों आदि को खाद्यान्न सामग्री एवं वस्त्र आदि वितरित किए।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. आदित्यानंद महाराज, महंत फूलडोल दास जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी नवल गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर डॉ. अवशेषानंद महाराज, महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज, प्रेम मन्दिर के जन सम्पर्क अधिकारी अजय त्रिपाठी, डॉ. रमेश चंद्र विधिशास्त्री एवं युवा साहित्यकार राधाकांत शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
महोत्सव में रामदेव सिंह भगौर, देवी सिंह कुंतल, राजकुमार पालीवाल, रामप्रकाश सक्सेना, आदि की उपस्थिति विशेष रही। संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।
डॉ. गोपाल चतुर्वेदी

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Rekha Singh

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