कार्यक्रम

श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के द्वारा त्रिदिवसीय श्रीराधा जन्म महोत्सव कार्यक्रम प्रारम्भ

वृन्दावन। छीपी गली स्थित श्रीहित परमानंद दास जी महाराज की साधना स्थली ठाकुर प्रियावल्लभ कुंज में श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के द्वारा त्रिदिवसीय श्रीराधा जन्म महोत्सव विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रारम्भ हो गया है। महोत्सव का शुभारंभ राधावल्लभीय सम्प्रदायाचार्य युवराज मोहित मराल गोस्वामी ने ध्वजारोहण करके किया। साथ ही उन्होंने कहा कि श्रीहित परमानंद जी महाराज 18वीं शताब्दी के रससिद्ध सन्त एवं प्रख्यात वाणीकार थे। यहाँ उनके सेव्य ठाकुर विजयराधावल्लभ लाल जी महाराज एवं उनकी शिष्या प्रिया सखी (दतिया की महारानी) के सेव्य ठाकुर प्रियावल्लभ जी महाराज विराजमान हैं। जिनकी सन्निधि में हम सभी यहाँ राधा जन्म महोत्सव धूमधाम के साथ मना रहे हैं। यह हम सभी के लिए अत्यंत गौरव की बात है।
श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य विष्णुमोहन नागार्च एवं समन्वयक डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि रस साम्राज्ञी राधा रानी परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति हैं। उनकी कृपा से ही कृष्ण तत्व की प्राप्ति होती है। श्रीकृष्ण तत्व व राधा तत्व अभिन्न हैं। भारतीय संस्कृति, साहित्य,धर्म और जनजीवन में राधा रानी का इतना महत्वपूर्ण स्थान है कि बगैर उनके श्रीकृष्ण के माधुर्य व उनकी भक्ति की प्राप्ति नही हो पाती है। उन्होंने कहा कि राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की समस्त लीलाओं का मूल आधार हैं।
भागवताचार्य ललित वल्लभ नागार्च व पार्षद रसिक वल्लभ नागार्च ने कहा कलयुग पावनावतार चैतन्य महाप्रभु राधा भाव से ही भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करते थे। जगतजननी राधा को “पद्मपुराण” में श्रीकृष्ण की आत्मा कहा गया है। श्रीहित हरिवंश महाप्रभु ने राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण से भी अधिक प्रधानता दी है।उन्होंने इन्हें अपना इष्ट व गुरु दोनों ही माना है। यहां तक कि उन्होंने अपने सम्प्रदाय तक का नाम “श्रीराधावल्लभ सम्प्रदाय” रखा।
भावना ट्रस्ट के अध्यक्ष जुगलकिशोर शर्मा व आचार्य रासबिहारी मिश्रा ने कहा कि ब्रज में राधा रानी की श्रीकृष्ण से भी अधिक मान्यता है। यहां चारों ओर उनका ही साम्राज्य है। कहा जाता है कि राधा रानी ने ही भगवान श्रीकृष्ण को पूर्णत्व प्रदान किया।उन्होंने कहा कि ब्रज में वृन्दावन से लेकर बरसाने तक चहुंओर उनकी ही सरकार चलती है।
इस अवसर पर डॉ. श्यामबिहारी लाल खण्डेलवाल व डॉ. जयेश खण्डेलवाल की मुखियाई में मंगल बधाई समाज गायन, “हित वाणी” का सन्तों व विप्रों द्वारा संगीतमय पाठ एवं रात्रि को रासाचार्य स्वामी अमीचंद शर्मा की रासमण्डली द्वारा रासलीला का अत्यंत मनमोहक व चित्ताकर्षक मंचन किया गया।
महोत्सव में डॉ. चन्द्रप्रकाश शर्मा, हितवल्लभ नागार्च, तरुण मिश्रा, भरत किशोर शर्मा, राधाकांत शर्मा, कीर्ति नागार्च, हितानन्द नागार्च, प्रेमानन्द नागार्च,रसानंद नागार्च,पार्षद वैभव अग्रवाल, दिव्यानंद नागार्च आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।
डॉ. गोपाल चतुर्वेदी
महोत्सव समन्वयक

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