डॉ.अनुज कुमार सिंह सिकरवार
अपने देश अनेका प्रकार के फल पैदा होते है,लेकिन इनमें सर्वश्रेष्ठ फल ‘आम’कहा जाता था,क्योंकि यह फल एक इसके उपयोग अनेक हैं।यह पोषक तत्त्वों से परिपूर्ण होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी युक्त है। इसी कारण ‘आम को फलों का राजा कहा जाता है, जो देश कई राज्यों में पाया जाता है।
आम को संस्कृत में ‘आम्र’ कहा जाता है, तो प्राकृत भाषा में ‘अम्ब’। इसका वानस्पतिक वैज्ञानिक नाम ‘मेंगीफेरा इण्डिका’ है। इसके दूसरे पर्यायवाची नाम- आम्र, पिकबन्धु, सहकार, रसाल, रसाला, अम्ब, कामशर, अतिसौरभ हैं।
भारत का एक प्रधान मीठा, रसीला/रसभारा, अत्यन्त स्वादिष्ट फल है। इसके वृक्ष को ‘आम’ कहा जाता है। देश की अलग-अलग भाषा तथा बोलियों में आम्र को अलग-अलग नाम से पुकारा या जाना जाता है। यथा- हिन्दी,ब्रज,अवधी, मैथिली में ‘आम’ कहा जाता है। भोजपुरी में ‘अमवाँ’कन्नड़ में ‘आपुस’, तमिल ‘मंगल’/‘मा’, तेलुगू में ‘ममिड’/‘ममाडा’, मराठी में ‘आँबा’/ ‘आम्बा’, गुजराती ‘आँम्बा’
आम के फल और उसके गुण यानी स्वाद के आधार पर इसकी कई किस्में ,प्रजातियाँ है,जो सामान्यतः कलम विधि द्वारा तैयार की जाती हैं जैसे-देसी, कलमी, तोतापरी, लगड़ा, आम्रपाली, दशहरी, मलिहाबादी(काकोरी), अल्फान्सों, चौसा, आदि। वैसे बताया जाता है कि आम की सैकड़ों प्रजातियाँ हैं।
जहाँ कच्चे आम यानी अमिया का उपयोग सब्जी के रूप में काशीफल की सब्जी को खट्टा बनाने, कच्चे आम की मिठ्ठी लौंजी, बेसन के साथ उबाल कर खट्टा ‘आमझौरा’, उबले हुुए कच्चे आम के रस में चीनी, जीरा डालकर ‘आम का पना’, कच्चे आम के कई प्रकार के आचार,मुरब्बा बनाए जाने के साथ-साथ कच्चे आम का छिलका साफ कर इसे काट सूखाकर आमचूर या आम की खटाई तैयार की जाती है, वहीं पके हुए आम खाने के साथ-साथ उसके रस से आम का पपाड़ आदि तैयार किये जाते हैं। आम का पना गर्मी में लू से बचाता है और शीतलता प्रदान करता है। आम दस्तवर है,इससे पेट साफ होता है।लेकिन अधिक आम खाने पर दूध पीना आवश्यक है अन्यथा दस्त लग सकते हैं। आम खट्टा होने के कारण विटामिन सी से भरपूर है।मीठा है,तो कार्बोहाइडेªेट होना स्वाभाविक है,जो ऊर्जा प्रदान करती है।






















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