Tag - प्रकाश गुप्ता ‘बेबाक’

कविता

हर इक बात मेरे पापा की बड़ी निराली होती थी,

अपने पिताजी को समर्पित हर इक बात मेरे पापा की बड़ी निराली होती थी, आँसू पीकर सदा एक्टिंग हँसने वाली होती थी। गहरे से गहरे संकट में पापा कभी न डरते थे, कभी नहीं...

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