अवसाद लिए एकांतवास, व्याकुलता जीवन की संध्या. सहचर सानिध्य विकर्षण से, नश्वर कल्पना वोध वंध्या. * प्रियतम का वोध हृदय से है, स्थूल जगत की क्या सत्ता ? अदृश्य...
Tag - गौरी शंकर सिंह
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