इस्मत चुग़ताई ’साहब मर गया’ जयंतराम ने बाजार से लाए हुए सौदे के साथ यह खबर लाकर दी। ‘साहब- कौन साहब?’ ‘वह कांटरिया साहब था न?’...
Tag - इस्मत चुग़ताई
इस्मत चुग़ताई भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से पंद्रह बरस की होगी। बढवार भी तो पूरी नहीं हुई थी। भैया की सूरत से ऐसी लरजती थी जैसे कसाई से बकरी। मगर सालभर के...
इस्मत चुग़ताई जब मैं जाड़ों में लिहाफ़ ओढ़ती हूँ, तो पास की दीवारों पर उसकी परछाईं हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है और एक दम से मेरा दिमाग़ बीती हुई दुनिया के...
इस्मत चुग़ताई सहदरी के चौके पर आज फिर साफ – सुथरी जाजम बिछी थी। टूटी – फूटी खपरैल की झिर्रियों में से धूप के आडे – तिरछे कतले पूरे दालान में...

















This Month : 2307
This Year : 33512