-“यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एडवोकेट वरिष्ठ साहित्यकार/पत्रकार प्रख्यात साहित्यकार, सहृदय-श्रेष्ठ श्री उदय प्रताप सिंह जी न केवल...
साहित्य – शिक्षा – राजनीति की बहुमूल्य निधि : उदय प्रताप सिंह
-“यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एडवोकेट वरिष्ठ साहित्यकार/पत्रकार प्रख्यात साहित्यकार, सहृदय-श्रेष्ठ श्री उदय प्रताप सिंह जी न केवल...
राधाष्टमी (31 अगस्त 2025) पर विशेष -डॉ. गोपाल चतुर्वेदी राधा रानी परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण की अचिंत शक्ति हैं।उनकी कृपा से ही कृष्ण-तत्व की...
9मई जन्म दिवस पर विशेष- डॉ.बचन सिंह सिकरवार भारत और विश्व के इतिहास में महाराणा प्रताप की गणना उन बिरले परमवीर योद्धा में होती है, जिन्होंने जीवन...
14सितम्बर हिन्दी दिवस पर विशेष – वर्तमान में हिन्दी अपने विकास के जिस सोपन पहुँची है तथा उसके विकास का मार्ग प्रशस्त करने में जिन अगणित हिन्दी सेवी...
हर शाख़ पर कुसुम रस छाया है, स्वतंत्रता की दुल्हन पर संविधान का श्रंगार आया है। शीर्ष हिमालय पर तिरंगा गर्व से लहराया है, घाटी – घाटी नें राष्ट्रगान...
हिन्दी दिवस पर विशेष डाॅ.अनुज कुमार सिंह सिकरवार ‘मेरा नम्र ,लेकिन दृढ़ अभिप्राय है कि जब तक हम हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा दर्जा और अपनी -अपनी प्रान्तीय भाषाओं...
रचयिता – प्राग सिंह बैस सिर-दाढ़ी के खिचड़ी बार, स्कूटर पर सदा सवार, धुँआधार बेधड़क विचार, आत्मीयता अतुल्यागार । असहमत और भिन्न विचार वाक् भिड़न्त को सदैव...
30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष डॉ.बचन सिंह सिकरवार दुनियाभर में अखबार भले ही खबरों के लिए निकाले गए हों,पर अपने देश में विशेष रूप से हिन्दी पत्रकारिता...
ज्येष्ठ सुदी तीज 25मई पर विशेष- डॉ.बचन सिंह सिकरवार देश को स्वतंत्र हुए कोई 74साल हो गए, लेकिन अब तक हमने अपने इतिहास को न भारतीय दृष्टि स लेखन का प्रयास किया...
===== हुआ”तमाशा”पूर्ण,चूर्ण और जीर्ण हुईं प्रत्याशा. जस के तस हालात,लोक में शंसय और निराशा. शंसय और निराशा का दुर्योग छद्म छल कारी . जनता के...
परिवेश घात-प्रतिघात बगावत को पुनिआतुर ! कूटनीति निष्णात चचा-पापा सब चातुर ! चातुर-आतुर व्यस्त न्यस्त संकीर्ण तृषातुर ! हुआ कोष्ठ काठिन्य त्रिदोषज पथ्य भयातुर ...
????????????? कुटिल’कुचाली’ढीठता’लड़ी परस्पर जंग, जीत हार तय करेगी लोकतंत्र का ढंग. लोक तंत्र का ढंग छद्म छल लालच व्यापक, मानवीय हीनता वोध के...
अवसाद लिए एकांतवास, व्याकुलता जीवन की संध्या. सहचर सानिध्य विकर्षण से, नश्वर कल्पना वोध वंध्या. * प्रियतम का वोध हृदय से है, स्थूल जगत की क्या सत्ता ? अदृश्य...










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