Author - Rekha Singh

कहानी

जुलूस

फणीश्वरनाथ रेणु फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ एक नाम, जो आंचलिक साहित्य का पर्याय बन चुका है। ‘मैला आँचल’ और ‘परती परिकथा’ उनकी ऐसी सशक्त एवं अनुपम कृतियाँ हैं जो आंचलिक...

कहानी

जै गंगा !

 (रिपोर्ताज) फणीश्वरनाथ रेणु जै गंगा … इस दिन आधी रात को ‘मनहरना’ दियारा के बिखरे गांवों और दूर दूर के टोलों में अचानक एक सम्मिलित करूण पुकार मची...

कहानी

मैला आँचल

 फणीश्वरनाथ रेणु ‘मैला आँचल’ हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर...

कहानी

ईश्वर रे, मेरे बेचारे…!

फणीश्वरनाथ रेणु अपने संबंध में कुछ लिखने की बात मन में आते ही मन के पर्दे पर एक ही छवि ‘फेड इन’ हो जाया करती है : एक महान महीरुह… एक विशाल...

कहानी

अक्ल और भैंस

(व्यंग्य लेख) फणीश्वरनाथ रेणु जब अखबारों में ‘हरी क्रान्ति’ की सफलता और चमत्कार की कहानियाँ बार-बार विस्तारपूर्वक प्रकाशित होने लगीं, तो एक दिन श्री...

कहानी

पुरानी कहानी: नया पाठ

 फणीश्वरनाथ रेणु बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन – तूफान – उठा! हिमालय की किसी चोटी का बर्फ पिघला और तराई के घनघोर जंगलों के ऊपर काले-काले बादल मँडराने...

कहानी

कुत्ते की आवाज़

(रिपोर्ताज) फणीश्वरनाथ रेणु मेरा गांव ऐसे इलाके में जहां हर साल पश्चिम, पूरब और दक्षिण की – कोशी, पनार, महानन्दा और गंगा की – बाढ़ से पीड़ित प्राणियों के समूह...

कहानी

संवदिया

फणीश्वरनाथ रेणु हरगोबिन को अचरज हुआ – तो, आज भी किसी को संवदिया की जरूरत पड़ सकती है! इस जमाने में, जबकि गांव गांव में डाकघर खुल गए हैं, संवदिया के मार्फत...

कहानी

नैना जोगिन

 फणीश्वरनाथ रेणु रतनी ने मुझे देखा तो घुटने से ऊपर खोंसी हुई साड़ी को ‘कोंचा’ की जल्दी से नीचे गिरा लिया। सदा साइरेन की तरह गूँजनेवाली उसकी आवाज...

कहानी

ठेस

 फणीश्वरनाथ रेणु खेती-बारी के समय, गाँव के किसान सिरचन की गिनती नहीं करते। लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं। इसलिए, खेत-खलिहान की मजदूरी...

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