इस्मत चुग़ताई सहदरी के चौके पर आज फिर साफ – सुथरी जाजम बिछी थी। टूटी – फूटी खपरैल की झिर्रियों में से धूप के आडे – तिरछे कतले पूरे दालान में...
Author - Rekha Singh
आर. के. नारायण ठीक दोपहर के समय वह अपना थैला खोलता और ज्योतिष की दुकान लगाता : दर्जन भर कौड़ियाँ, कपड़े का चौकोर टुकड़ा जिस पर कई रहस्यमय रेखाएं खिंची थीं, एक...
आर. के. नारायण डॉ. रमन के पास मरीज बीमारी के आखिरी दिनों में ही आते थे। वे अक्सर चिल्लाते, ‘तुम एक दिन पहले क्यों नहीं आ सकते थे?’ इसका कारण भी साफ थाः डॉक्टर...
डॉ.बचन सिंह सिकरवार महाराष्ट्र के पालघर जिले के गाँव गढ़चिंचले में जूना अखाड़े के दो निहत्थे साधुओं की उनके कार चालक समेत भीड़ द्वारा पत्थरों और लाठी-डण्डों से...
डॉ.बचनसिंह सिकरवार पिछले कई माह से जहाँ अपना देश ‘कोरोना विषाणु’ से फैली वैश्विक महामारी से लोगों को बचाने को लेकर रात-दिन जंग सरीखी लड़ रहा है, उसमें हर तबके...
मुंशी प्रेम चंद साल-भर की बात है, एक दिन शाम को हवा खाने जा रहा था कि महाशय नवीन से मुलाक़ात हो गयी। मेरे पुराने दोस्त हैं, बड़े बेतकल्लुफ़ और मनचले। आगरे में...
मुंशी प्रेम चंद अपने घर में आदमी बादशाह को भी गाली देता है। एक दिन मैं अपने दो-तीन मित्रों के साथ बैठा हुआ एक राष्ट्रीय संस्था के व्यक्तियों की आलोचना कर रहा...
मुंशी प्रेम चंद बालको! तुमने राजाओं और वीरों की कहानियां बहुत सुनी होंगी, लेकिन किसी कुत्ते की जीवन-कथा शायद ही सुनी हो। कुत्तों के जीवन में एसी बात ही कौन...
मुंशी प्रेम चंद जब से वृजरानी का काव्य–चन्द्र उदय हुआ, तभी से उसके यहां सदैव महिलाओं का जमघट लगा रहता था। नगर मे स्त्रीयों की कई सभाएं थी उनके प्रबंध का सारा...
मुंशी प्रेम चंद 1 युवक का नाम केशव था, युवती का प्रेमा। दोनों एक ही कालेज के और एक ही क्लास के विद्यार्थी थे। केशव नये विचारों का युवक था, जात-पाँत के बन्धनों...


















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