Author - Rekha Singh

कहानी

आलसियों का आश्रम: लोक-कथा

एक बार एक राज्य में बहुत सारे लोग आलसी हो गए। उन्होंने सारा कामधाम करना छोड़ दिया। यहाँ तक कि अपने लिए खाना बनाना भी छोड़ दिया और खाने के लिए दूसरों पर निर्भर...

कहानी

चतुराई: लोक-कथा

एक ग़रीब आदमी था। एक दिन वह राजा के पास गया और बोला- ‘महाराज, मैं आपसे कर्ज़ मांगने आया हूं। कृपा कर आप मुझे पांच हजार रुपये दें। मैं पांच वर्ष के अंदर...

कहानी

अजगर : लोक-कथा

बहुत वर्ष पहले एक राजा की दो रानियाँ थीं। बड़ी रानी शोभा बहुत अच्छे स्वभाव की दयावान स्त्री थी। छोटी रानी रूपा बड़ी कठोर और दुष्ट थी। बड़ी रानी शोभा के एक...

आपके विचार

सरकारी तंत्र तथा प्राइवेट कम्पनियों के अनुचित गठजोड़ में पिसता भारतीय किसान

रामकृपाल सिंह महात्मा गाँधी का कथन है,‘‘भारत गाँव का देश है’’,यह कोविड-19 ने सत्य साबित कर दिया। कोविड-19 से फैली महामारी के बाद यदि अन्य किसी की चर्चा हो रही...

श्रद्धांजली

उपजा की पंकज कुलश्रेष्ठ को श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसियेशन (उपजा)की स्थानीय इकाई के समस्त पदाधिकारी और सदस्यगण अपने वरिष्ठ पत्रकार साथी पंकज कुलश्रेष्ठ समाचार उपसम्पादक दैनिक जागरण के...

आपके विचार

सरकारी मशीनरी की खामियाँ की पोल खोलती स्वच्छ हुई नदियाँ

राधेबाबू अग्रवाल कोरोना विषाणु से फैली महामारी से भारत समेत विश्वभर के देशों को जनधन की भारी क्षति हो रही है और न जाने कब तक यह होती रहेगी? इस महामारी के...

कहानी

ओ हरामजादे !

भीष्म साहनी घुमक्कड़ी के दिनों में मुझे खुद मालूम न होता कि कब किस घाट जा लगूंगा। कभी भूमध्य सागर के तट पर भूली बिसरी किसी सभ्यता के खण्डहर देख रहा होता, तो...

कहानी

वाङ्चू

भीष्म साहनी तभी दूर से वाङ्चू आता दिखाई दिया। नदी के किनारे, लालमंडी की सड़क पर धीरे-धीरे डोलता-सा चला आ रहा था। धूसर रंग का चोगा पहने था और दूर से लगता था कि...

कहानी

मरने से पहले

भीष्म साहनी मरने से एक दिन पहले तक उसे अपनी मौत का कोई पूर्वाभास नहीं था। हाँ, थोड़ी खीझ और थकान थी, पर फिर भी वह अपनी जमीन के टुकड़े को लेकर तरह-तरह की...

कहानी

फ़ैसला

 भीष्म साहनी उन दिनों हीरालाल और मैं अक्सर शाम को घूमने जाया करते थे । शहर की गलियाँ लाँघकर हम शहर के बाहर खेतों की ओर निकल जाते थे । हीरालाल को बातें करने का...

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