महोत्सव के अंतर्गत श्रीनिंबार्क भागवत कथा में व्यास पीठ से पं. रमेश चंद्र शास्त्री महाराज ने श्रवण कराई महात्म्य की कथा
(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)
वृन्दावन।वाराह घाट-परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीगौतम ऋषि आश्रम में निंबार्क संस्कृत महाविद्यालय एवं गौतम ऋषि आश्रम के संस्थापक सन्त शिरोमणि पण्डित बिहारी दास त्यागी महाराज का अष्ट-दिवसीय वार्षिक महोत्सव अनंतश्री विभूषित मुकुंद शरण बाबा महाराज एवं श्रीमहंत सर्वेश्वर शरण महाराज ( मामाजी ) के पावन सानिध्य में अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ प्रारम्भ हो गया है। जिसके अन्तर्गत भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारम्भ हुई सप्तदिवसीय श्रीनिंबार्क भागवत कथा में व्यास पीठ से प्रख्यात भागवताचार्य पण्डित रमेश चंद्र शास्त्री महाराज “व्याकरणाचार्य” (करौली) ने अपनी सुमधुर वाणी के द्वारा समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य श्रवण कराया।
व्यासपीठाधीन पण्डित रमेश चंद्र शास्त्री (करौली) ने कहा कि महर्षि वेदव्यासजी द्वारा रचित श्रीमद्भागवत महापुराण में सभी धर्म ग्रंथो का सर निहित है, इसीलिए इसे पंचम वेद कहा गया है।वस्तुत: यह ग्रंथ अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक परमब्रह्म परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। जिसका श्रवण, वाचन व अध्ययन करने मात्र से प्राणियों के समस्त पापों का नाश हो जाता है।साथ ही उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।इसीलिए सभी प्राणियों को श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण करना चाहिए।
महोत्सव के अंतर्गत ब्रज सेवा संस्थान के द्वारा भागवताचार्य पण्डित रमेश चंद्र शास्त्री महाराज का उनके द्वारा धर्म व अध्यात्म के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए सम्मान किया गया।उन्हें यह सम्मान ब्रज सेवा संस्थान के अध्यक्ष व प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, महामंडलेश्वर स्वामी रामदास महाराज (अयोध्या) एवं डॉ. राधाकांत शर्मा आदि ने संयुक्त रूप से ठाकुरजी का छवि चित्र, प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र भेंट करके व माल्यार्पण करके दिया।साथ ही प्रभु से उनके उज्ज्वल भविष्य एवं समृद्ध जीवन की मंगल कामना की।





















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