कार्यक्रम

ठाकुरश्री प्रिया वल्लभ कुंज में धूमधाम से सम्पन्न हुआ द्वादश दिवसीय 212 वां पाटोत्सव

महोत्सव के अंतर्गत समाज गायन परंपरा में मृदंग वादकों को सम्मानित किया गया

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन। छीपी गली/पुराना बजाज स्थित ठाकुर श्रीप्रियावल्लभ कुॅंज में श्रीहित परमानंद शोध संस्थान एवं श्रीहित उत्सव चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा चल रहा है द्वादश दिवसीय 212 वां पाटोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ।जिसके अन्तर्गत प्रातः काल 05:30 खिचड़ी महोत्सव आयोजित किया गया।साथ ही ठाकुर विग्रहों का पंचामृत से महाभिषेक कर अंगसेवी आचार्य रसिक वल्लभ नागार्च के द्वारा नवीन पोषक धारण कराकर उनकी श्रृंगार आरती की गई।तत्पश्चात रस भारती संस्थान, वृन्दावन के तत्वावधान में श्रीहित जस अलि शरण महाराज की मुखियायी में मंगल बधाई समाज गायन किया गया।जिसके अन्तर्गत श्रीहित परमानंद दास महाराज द्वारा रचित प्रिया वल्लभ अष्टक का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन किया गया।
इस अवसर पर “श्रीहित वाणी चिन्तन” व “श्रीहित परमानंद वाणी चिन्तन” विषय पर आयोजित सन्त-विद्वत सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए घमंड देवाचार्य पीठ के (चैन बिहारी कुंज) के अध्यक्ष जगतगुरु स्वामी वेणुगोपाल शरण देवाचार्य महाराज एवं प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि प्रिया सखी की छाप जिन पदों में आई है,वह भेंट के पद माने जाते हैं।दतिया की महारानी बख्त कुंवरि (प्रिया सखी) रससिद्ध सन्त श्रीहित परमानंद दास महाराज की शिष्या थीं। जैसा कि “गुरु भक्ति विलास” नामक ग्रंथ में वर्णित है – “प्रिया सखि सेवक भई परमानंद की आय, राधा वल्लभ बस किए अद्भुत लाड लड़ाए।”
श्रीहित उत्सव चैरिटेबल ट्रस्ट के संरक्षक आचार्य विष्णु मोहन नागार्च एवं अध्यक्ष श्रीहित ललित वल्लभ नागार्च ने कहा कि ठाकुरश्री प्रिया वल्लभ कुंज में प्रथम पाटोत्सव विक्रम संवत 1870 में श्रीहित परमानंद नागार्च के द्वारा आयोजित किया गया था।उस समय उनके द्वारा जो समाज श्रृंगाला तैयार की गई थी, उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए आज भी उन्हीं पदों का संगीतमय गायन होता है।
सन्त-विद्वत सम्मेलन में आचार्य विवेक भारद्वाज, परम् हितधर्मी डॉ. चन्द्र प्रकाश शर्मा, डॉ. राजेश शर्मा, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा एवं महंत मधुमंगल शरण शुक्ला आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।
महोत्सव के अंतर्गत श्रीहित परमानंद शोध संस्थान एवं श्रीहित उत्सव चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में समाज गायन परंपरा के मृदंग वादकों को सम्मानित किया गया।जिसमें गणेश शर्मा, कृष्ण गोपाल शर्मा, बाबा गोपाल दास, जनार्धन, कन्हैया शर्मा, किशोरी शरण भक्तमाली, बाबा लाल बिहारी, मोहन श्याम दीक्षित, जुगल किशोर चौबे, नटवर भरद्वाज, बाबा प्रियाशरण दास, हर्ष, बाबा राधारमण, बाबा राधामोहन दास, को श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के अध्यक्ष आचार्य विष्णुमोहन नागार्च और श्रीहित उत्सव चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीहित ललित वल्लभ नागार्च ने अभिनंदन पत्र भेंट कर, उत्तरीय ओढ़ा कर व सेवा राशि प्रदान कर स्वागत किया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी रामदास महाराज (अयोध्या), बाबा हित शरण, चंद्र मोहन नागार्च, पण्डित रासबिहारी मिश्र, पंडित जुगल किशोर शर्मा, रासाचार्य स्वामी राधाकांत शर्मा ( छोटे स्वामी ), तरुण मिश्र, भरत शर्मा, श्रीमती कमला नागार्च, बाबा राधावल्लभ शरण, बाद ग्राम के समाज मुखिया खेलन बिहारी, भरत शर्मा (मथुरा वाले), सतीश रस्तोगी, छैल बिहारी खंडेलवाल, श्रीमती ऋचा नागार्च, कीर्ति नागार्च, शेषाद्री नागार्च, दिव्या खंडेलवाल, गोविन्द खंडेलवाल, किशोरी खंडेलवाल, शिव शंकर वशिष्ठ, हित वल्लभ नागार्च, हितानन्द, रसानंद, प्रेमानंद, दिव्यानंद आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।महोत्सव का समापन सन्त, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारे के साथ हुआ।जिसमें असंख्य व्यक्तियों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

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Rekha Singh

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