डाॅ.बचन सिंह सिकरवार
हाल में खाड़ी इलाके में एक-दूसरे के अत्यन्त निकट सहयोगी रहे सुन्नी मुस्लिम मुल्क सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) अपने-अपने निहित स्वार्थों और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर पड़ोसी देश यमन गृहयुद्ध की आग में अभी सुलग रहा है और कब जल उठेगा?अभी कहना मुश्किल है,जो दशकों से पहले ही अशान्त और एक तरह से गृहयुद्ध ग्रस्त है। इस नए संघर्ष की शुरुआत गत 30दिसम्बर को सऊदी अरब द्वारा यमन के मुकाल पोर्ट पर बमबारी से हुई है। इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद यमन के अदन अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गत गुरुवार, 1जनवरी,2026 को उड़ानें रोक दी र्गइं,जो खाड़ी देशों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) के बीच बढ़ते संकट का नवीनतम संकेत है। इन दोनों देशों की प्रतिद्वन्द्विता युद्धग्रस्त यमन को नया रूप दे रही है। अदन का यह हवाई अड्डा कुख्यात खूंखार इस्लामिक दहशतगर्द संगठन‘हाउती’ के नियंत्रण से बाहर है। फिलहाल, यह अड्डा ही यमन के विभिन्न हिस्सों के लिए मुख्य अन्तरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार है। इसके उपरान्त सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार के लड़ाकू विमानों द्वारा यू.ए.ई.समर्थित ‘ दक्षिण संक्रमणकालीन परिषद्’(एस.टी.सी.)के कब्जे वाले इलाकों पर बम गिराने के साथ-साथ जमीनी हमले भी किये हैं। इन हमलों में सऊदी अरब के लड़ाके विमानों ने भी हिस्सा लिया। सऊदी अरब के प्रभाव वाली सरकार ने यह कार्रवाई देश में कब्जा बढ़ाने की एस.टी.सी. के योजना को कमजोर और यमन के तेल और प्राकृतिक गैस के कुओं पर कब्जे को प्रयासरत एस.टी.सी. के कब्जे में जाने से बचना है।इन पर सऊदी अरब की नजर है। इस कार्रवाई के कारण दो सबसे मजबूत देशों सऊदी अरब-संयुक्त अरब अमीरात के मध्य तनाव बेहद बढ़ गया है।
इस हमले के बारे में सऊदी अरब का कहना है कि उसने दो हवाई जहाजों को निशाना बनाया,जो संयुक्त अरब अमीरात(यू.ए.ई.) के फुजैराह पोर्ट से हथियार और सैन्य वाहन लेकर यमन आए थे और जिन्हें यहाँ उतारा जा रहा था।ये शस्त्र/हथियार और सैन्य वाहन अलगाववादी समूह ‘दक्षिण संक्रमणकालीन परिषद्’(एसटीसी) को भेजे जा रहे थे।जिन हवाई जहाजों से हथियार आए,उनके चालक दल ने टैªकिंग सिस्टम को भी निष्क्रिय कर दिया था। ये हथियार यमन की एकता और अखण्डता को भंग कर पृथक स्वतंत्र दक्षिण यमन के गठन में अलगाववादी संगठन ‘दक्षिण संक्रमणकालीन परिषद्‘(एस.टी.सी.) को भेजे गए थे। इनके मिलने यमन की शान्ति और स्थिरता को पहले से अधिक खतरा पैदा हो जाता है।इसलिए सऊदी अरब की वायुसेना ने हथियारों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाकर एक सीमित हवाई हमला किया। लेकिन यूएई ने अपने ऊपर लगे इस आरोप का पुरजोर खण्डन किया है। सऊदी अरब के हमले के बाद यमन को अपने इस अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से को यातायात बन्द किये जाने को विवश होना पड़ा है।
यू.ए.ई. और सऊदी अरब के मध्य तनाव की सबसे बड़ा कारण एस.टी.सी. है,जो दक्षिण यमन का सबसे शक्तिशाली अलगाववादी समूह है,जिसका गठन 2017 मेें उन सभी अलगाववादी समूहों को मिलाकर हुआ थो,जो दक्षिणी यमन का स्वतंत्र देश को रूप में बहाल करना चाहते हैं। इस समूह ने दक्षिणी यमन के अधिकांश भू-भाग पर कब्जा किया हुआ है। वस्तुतः, सन् 1990 से पहले यमन उत्तरी और दक्षिण यमन में विभाजित था। दोनों के एकीकरण के बावजूद अभी भी अलगाव की भावना बनी हुई है। एस.टी.सी. को यू.ए.ई. का समर्थन प्राप्त है। हाल में एस.टी.सी. ने यमन में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए। उसके लड़ाकों ने हद्रामौत और अल-मह्रा जैसे तेल और गैस समृद्ध इलाकों पर कब्जा कर लिया है। इस वजह से यमन सरकार के सुरक्षा बलों को पीछे हटना पड़ा। 15दिसम्बर को एसटीसी ने अबयान के पहाड़ी इलाकों पर हमला किया था। इसके जवाब में सऊदी अरब ने हद्रामौत के वादी नहाब क्षेत्र में हवाई हमले किये। यमन में सऊदी अरब और यूएई ही संघर्षरत नहीं हैं, यहाँ ईरान भी इस मुल्क के शियाओं को सियासी बढ़त देने के लिए शिया दहशतगर्द संगठन ‘हाउती’को आर्थिक, सैन्य साजो-समान से ही नहीं,नैतिक समर्थन भी देता आया है। यमन की अशान्ति के लिए में ईरान भी जिम्मेदार है। हाउती दहशतगर्दों ने इजरायल-फलस्तीन युद्ध में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इसके साथ ही ये अमेरिका और उसके समर्थक मुल्कों के मालवाहक जहाजों का रास्ता रोक कर उन्हें लूटते आए हैं। हाउती के दहशतगर्द भी सऊदी अरब समर्थित सुन्नी सरकार की नाकमदम किये हुए हैं।दरअसल, इस्लामिक दुनिया में मुसलमानों का खलीफा बनने की होड़ लगी है,जो तुर्की खिलाफत खत्म होने के बाद से सऊदी अरब मक्का,मदीना और आर्थिक रूप से मजबूत होने के खुद खलीफा मानता आया है,पर शिया बहुल ईरान को मंजूर नहीं। इधर तुर्की,पाकिस्तान, मलेशिया,कतर,यू.ए.ई भी इसके दावेदार बने हुए हैं।
अब जहाँ तक यमन का प्रश्न है तो खाड़ी इलाके में स्थित है और सऊदी तथा ओमान का पड़ोसी है। यमन की राजधानी -सना और वाणिज्य राजधानी- अदन है। उत्तर यमन ,जिसे साना कहा जाता है। पहाड़ियों से घिरा एक मुल्क है।इसका दक्षिणी भाग लाल सागर पर अरब प्रायद्वीप को स्पर्श करता है। इसका पड़ोसी देश सऊदी अरब है इसका क्षेत्रफल- 5,31,000वर्ग किलो मीटर और जनसंख्या- 2,24,92,035 से अधिक है। इस मुल्क की भाषा- अरबी और यहाँ के लोग इस्लाम को मानते हैं,इनमें 60से 65 प्रतिशत सैफी सुन्नी मुसलमान और 30से 35फीसदी शिया हैं। 22मई,1990 में अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी-पश्चिमी यमन गणराज्य में उत्तर गणराज्य में उत्तर और दक्षिण यमन का एकीकरण हो गया। उत्तरी यमन सन् 1962 में स्वतंत्र हुआ था, जबकि दक्षिण यमन 30नवम्बर, सन्1967 को ब्रिटिश साम्राज्य की दासता से मुक्त हुआ और अरब जगत् में दक्षिणी यमन एकमात्र साम्यवादी मुल्क बना। तब से यह यमन गणराज्य कहलाने लगा। उत्तर में लगभग 3लाख दक्षिण यमनी विस्थापित रहते हैं। ये ज्यादातर वे लोग है जिनकी मुक्ति मोर्चा से नहीं पट पायी और अपनी जान बचाने की उद्देश्य से उत्तर भाग आए। दक्षिण मंे उत्तर यमनियों की संख्या बहुत कम है। उत्तर में ये निष्कासित यमनी सीमा पर आतंक का सामान जुटाते रहते हैं जिससे असुरक्षा का माहौल बना रहता है।
इसके पश्चात् अप्रैल, 1994 में दक्षिण और उत्तरी यमन की सैनिक टुकड़ियों में युद्ध छिड़ गया। 5मई को आपातकाल की घोषणा कर दी गयी। फिर 21 मई को दक्षिण यमन ने अपने को संयुक्त यमन से अलग करते हुए स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। तत्पश्चात् 7जुलाई, 1994 करे दो माह तक चल गृहयुद्ध में उत्तरी यमन की सेनाओं के दक्षिण शहर इडेन पर आधिपात्य के साथ समाप्त हो गया। इस युद्ध के कारण लगभग 3अरब डाॅलर का नुकसान हुआ। 28जुलाई,1994 को यमन सरकार ने कहा कि वह पराजित दक्षिण यमन से संयुक्त राष्ट्र के तत्त्वावधान में बातचीत न करके घरेलू वातावरण में पुनःसंरचना का माहौल बनाएगा। सदियों पूर्व यमन एक समृद्ध देश था। यहाँ मसाले और खनिजों की भरमार थी। महान शीबा रानी के राज्यकाल में यमन एक खुशहाल देश जाना जाता था। इस देश की अर्थव्यवस्था तेल और कृषि पर आधारित है। इसके मुख्य कृषि उत्पाद काॅफी,खजूर, जड़ी-बूटी, फल मिलिट/मोटे अनाज और मक्का है। कपास,काॅफी और खालों और चमड़े का निर्यात किया जाता है।
इस दौरान चैथम हाउस के मध्यपूर्व की शोधकर्ता फारेया उल मुस्लिमी ने ‘द गार्जियन’ से कहा,‘‘ ये घटनाएँ संकेत देती हैं कि स्थिति एक विशेष रूप से खतरनाक दौर में प्रवेश कर रही है।यह घटनाक्रम कतर से जुड़े 2017के खाड़ी संकट की भयावह समानता दर्शाता है,जब सऊदी अरब और यूएई ने एक बड़े राजनयिक सम्बन्ध विच्छेद को अंजाम दिया था,जिसने क्षेत्रीय सम्बन्धों को कई वर्षों तक अस्थिर कर दिया था।’’ अफसोस की बात यह है कि सालों से फिरका परस्ती की आग में जल रहे यमन की आग को बुझाने के लिए किसी मुसलमान रहनुमा ने कोशिश नहीं की,इसके उलट पड़ोसी मुल्क अपने निहित स्वार्थों,क्षेत्रीय वर्चस्व और फिरकापरस्ती को लेकर सुलगती आग में घी डालकर दहकाने में लगे हैं।
सम्पर्क-डाॅक्टर बचन सिंह सिकरवार वरिष्ठ पत्रकार, 63ब,गाँधी नगर,आगरा-2820003 मोबाइल नम्बर-9411684054





















This Month : 7337
This Year : 7337
Add Comment