ज्योति स्वरूप गौड़
उप- निरीक्षक
दिल्ली-पुलिस
भारत एक लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष देश हैं। अनेकता में एकता भारत की विविधता है। आतंकवाद का अर्थ है। विनाशलीला। जो अपने उद्देश्यों को पूरा करने या करवाने के लिए देशद्रोही आतंकवाद का सहारा लेते हैं। जो देश के विकास, उन्नति और शान्ति में सबसे बड़ा बाधक है। भारत युवा देश है। हमें युवा देश होने पर नाज हैं लेकिन हमारे युवा यौवन के जोश में समाज में बढ़ते खुलेपन और नैतिक मूल्यों में गिरती गिरावट के कारण युवाओं की जीवन शैली में भौतिकवाद का जहर इस कदर घुल गया है। जो क्षणिक आनंद के लिए युवा-पीढ़ी नशे के आगोश में आनंदविभोर होती जा रही है। आतंकवाद के पोषण में कट्टरवाद, रूढ़िवादिता, धर्मान्धता अहम् भूमिका निभाते है। नशा युवा-शक्ति को नष्ट कर देता है। आधुनिक भौतिकवाद युग में आतंकवाद और ड्रग्स के जहर ने देश और दुनिया में अपने पांव तेजी से पसार लिए है। युवा पीढ़ी तेजी से तरक्की पाने के मंसूबे को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। युवा शक्ति पथ से भटककर आतंकवाद और नशे से नाता-जोड़कर कामयाबी की मंजिल चूमने के लिए लालायित हो चुकी है।
आइए जानते है आतंकवाद की विनाशलीला?
आतंकवाद की खेती में अनाथ, बेसहारा, लावारिस बच्चों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर आतंक की खेती में धकेल दिया जाता है। आतंकियों को तालीम देने का काम उन्ही देशों में होता है जहां युवाओं को अपने भविष्य के बारे में कुछ पता नहीं होता। जहां बेरोजगारी में देश उबल रहा होता है। रोजगार पाने के उद्देश्य से आतंक का रास्ता अपना लेते है। उनके लिए जीवन-मरण कोई मायने नहीं रखता। उनकी मंशाए आक्रामक और दिल-दहला देने वाली होती है। हिंसा लोगों को नारकीय जीवन जीने को मजबूर कर देती है। अब आधुनिक युग में आतंकवाद की खेती में शिक्षित वर्ग सफेदपोश अपराधियों ने जो पेशे से इंजीनियर, डाक्टर आदि ने गुनाह की दुनिया मैं अपने कदम रख दिए हैं। जिनको सफेदपोश आतंकवाद भी कहा जाता है। सफेदपोश आतंकवाद में शामिल गुनहगार जो ड्रोन, राकेट के घातक हमलों से देश मैं तबाही का मंजर लाने की हिमाकत करते हैं। लालकिले पर सफेदपोश आतंकवाद की विनाशलीला उनके खतरनाक मंसूबों का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो फिलिस्तीन, इजरायल, यूक्रेन, रूस, आदि इस दंश को झेल रहे है। पड़ोसी मुल्क में आतंकवाद की खेती की जाती है। इस मुल्क द्वारा विश्व के अन्य देशों में आतंक की पौध निर्यात की जाती है। इसके जहरीले बीज अब उनके अपने गेंहूं में मिक्स हो गए है। अब उनको हर निवाला निगलने में कठिनाई होने लगी है। हिंसा से समाज में नफरत, अंशाति, तनाव, मनमुटाव, राष्ट्र की संपति का विनाश, निर्दोष लोगों की मौत हिंसा का परिणाम होता है। हिंसा का रास्ता देश दुनिया के लिए नासूर है।
आइए जानते है। ड्रग्स की विनाशलीला क्या होती है?
नशा, मनुष्य को तबाही की ओर ले जाता है। जहां जीवन का कोई उद्देश्य नहीं रहता। जहां जीवन शून्य हो जाता है। सपने बिखर जाते हैं, टूट जाते हैं। जीवन को खोखला कर देता है। डर और भय जीवन में अंधकार फैला देता है। एकाग्रता की शक्ति को खत्म कर देता है। जीवन एक तमाशबीन बन जाता है। नशा युवाओं के सारे मंसूबे खाक कर देता है। समाज, परिवार, पड़ोस उससे दूरी बना लेता है। आधुनिक जीवन शैली मैं यूवा पीढ़ी भौतिकवाद की चकाचौंध मैं आकर युवा शक्ति क्षणिक आनंद के चक्कर में नशे के आगोश में जकड़ती जा रही हैं। खुद को बिंदास, बेपरवाह दिखाने के चक्कर में युवा शक्ति नशे की चपेट में आ रही है।
अंत मै युवाओं को संदेश देकर चेताना, जगाना चाहता हूं। आतंकवाद और ड्रग्स की चपेट में आकर जीवन को बर्बादी से रोकना होगा। इस बर्बादी का असर परिवार, समाज और राष्ट्र को झेलना पड़ता है। युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होती है। जिनके कन्धों पर राष्ट्र का विकास होता है। अब समय आ गया है युवाओं को अपनी समस्याओं के कारणों की खोज यर्थाथवादी ढ़ग से करनी होगी। युवाओं को सत्य स्वीकारना होगा। नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारना होगा। भौतिकवाद-चकाचौंध के जहर से बचना होगा। कड़ी-मेहनत, मशक्कत करके कामयाबी की मंजिल को चूमना होगा। आतंकवाद की खेती के पोषण में चाहे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल गुनाहगारों को उनके गुनाहों के हिसाब से आखिरी निर्णायक उनके आतंक का हिसाब करना होगा। सफेदपोश अपराधियों पर कड़ी नजर रखनी होगी। तभी देश का विकास, उन्नति और शान्ति स्थापित हो सकती है। तभी युवा पीढ़ी देश और दुनिया में विश्व के मानचित्र पर अपनी दस्तक देकर अपना लोहा मनवा सकती हैं।




















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