कार्यक्रम

सीतामढ़ी में 51 शक्तिपीठों के ज्योत लाएगी रामायण रिसर्च काउंसिल

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन। छटीकरा रोड़ स्थित होटल किरधा रेजीडेंसी में रामायण रिसर्च काउंसिल, नई दिल्ली के तत्वावधान में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई जिसमें मां सीताजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी में 51 शक्ति पीठों से मिट्टी एवं ज्योत लाकर सीतामढ़ी को तीर्थ एवं शक्ति क्षेत्र के रूप में विकसित करने संबंधी संकल्प पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संचालन कर रहे सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी एवं काउंसिल के ट्रस्टी देव दत्त शर्मा ने सभी संतों को काउंसिल के विभिन्न प्रकल्पों एवं सीतामढ़ी में काउंसिल के क्रियाकलापों की जानकारी देते हुए कहा कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने काउंसिल को लगभग 12 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। जिस पर एक शक्तिपुंज के रूप में ज्योत स्थापित होगी।
उन्होंने बताया कि सीतामढ़ी में राघोपुर बखरी स्थित श्रीराम जानकी स्थान पर हनुमानजी के 108 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ जटायुजी की 51 फीट ऊंची प्रतिमा एवं धनुष की 51 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।
श्रीउमाशक्ति पीठाधीश्वर स्वामी रामदेवानन्द सरस्वती महाराज एवं सन्त प्रवर स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा कि सनातन धर्म के प्राचीन सिद्ध स्थलों का संरक्षण होना चाहिए। इसके लिए सभी सनातनियों को तन-मन-धन से सहयोग करना होगा।
प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉक्टर गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी देवदत्त शर्मा भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ और कर्मठ अधिकारी रहे हैं। उनके द्वारा रामायण रिसर्च काउंसिल के द्वारा जो कार्य किए जा रहे हैं, वे अति प्रसंशनीय हैं। हम सभी को उनका तन, मन और धन से सहयोग करना चाहिए।
प्रमुख समाज सेविका प्रोफेसर (डॉ.) लक्ष्मी गौतम ने कहा कि वह सीता सखी समिति के अंतर्गत अधिक से अधिक बहनों को इसमें जोड़ने का प्रयास करेंगी।
काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल इस देश की एकमात्र ऐसी संस्था है जो सीताजी और रामजी पर साथ-साथ कार्य करती है। उन्होंने बताया कि काउंसिल ने अयोध्या में श्रीराममंदिर संघर्ष पर 1250 पृष्ठों का अब तक का सबसे बड़ा ग्रन्थ ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’ भी तैयार कर चुकी है, तो वहीं मां सीताजी के प्राकट्य-क्षेत्र सीतामढ़ी को भी तीर्थ एवं शक्ति-स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य कर रही है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्वामी ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि के लिए भी अभियान यहीं से प्रारंभ हुआ और अब प्रसन्नता है कि जगत जननी मां सीताजी के लिए भी काउंसिल के तत्त्वावधान में अभियान इसी वृंदावन से प्रारंभ हो रहा है।
बैठक में मुख्य वक्ता रहे चतु: संप्रदाय के श्रीमहन्त फूलडोल बिहारीदास महाराज और महामंडलेश्वर स्वामी सुरेशानन्द परमहंस समन्वयक थे।
भागवत प्रवक्ता आचार्य बद्रीश महाराज ने कहा कि वह कथावाचकों को एकजुट करेंगे और उनसे निवेदन करेंगे कि हर कथा में सीता माता के इस विषय की चर्चा हो।
इस अवसर पर महामण्डलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी आदित्यनन्द गिरि महाराज, भागवत किंकर अनुराग कृष्ण शास्त्री, महामण्डलेश्वर स्वामी चित्प्रकाशानन्द महाराज, महामण्डलेश्वर नवल गिरि महाराज, स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरि महाराज, महन्त सुन्दर दास महाराज, स्वामी कौशलेंद्रानन्द महाराज, स्वामी माधवानन्द महाराज, आचार्य आशुतोष चैतन्य, स्वामी शिवचंद्रानन्द महाराज, स्वामी परमानन्द सरस्वती, आचार्य हरिहर मुद्गल, स्वामी कमलेशानन्द सरस्वती महाराज, स्वामी अद्वैत मुनि, प्रमुख समाज सेवी कपिल देव उपाध्याय, पण्डित आर.एन. द्विवेदी (राजू भैया), आचार्य मोहित कृष्ण शास्त्री, आचार्य सुमंत कृष्ण शास्त्री, भागवत विदुषी श्रीहरि वर्षा कौशल, कपिल उपाध्याय, पूर्व सी.डी.ओ. राधे श्याम गौतम, डॉ. राधाकांत शर्मा, महन्त लाड़िली दास, जोगिन्द्र सिंह प्रजापति, पण्डित ध्रुव शर्मा, योगेंद्र शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस कार्यक्रम के लिए प्रख्यात श्रीराम कथा मर्मज्ञ सन्त विजय कौशल महाराज, महामंडलेश्वर गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज, श्रीनाभापीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्ण देवाचार्य महाराज, श्रीपीपाद्वाराचार्य जगद्गुरु बलरामदास देवाचार्य महाराज, सन्त सियाराम बाबा महाराज (गोवर्धन), ब्रह्मर्षि स्वामी देवदास महाराज (बड़े सरकार), भागवताचार्य डॉ. संजीव कृष्ण शास्त्री, डॉ. संजय कृष्ण सलिल, सन्त प्रवर टाट बाबा महाराज, बाबा सन्त दास महाराज, सन्त महेशानंद सरस्वती महाराज आदि ने अपनी शुभकामनाओं के द्वारा अपना आशीर्वाद प्रदान किया। संचालन देवदत्त शर्मा ने किया। बैठक का विश्राम स्वरुचि पूर्ण प्रीति भोज के साथ हुआ।

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Rekha Singh

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