कार्यक्रम

भारतीय जन नाट्य संघ(इप्टा),आगरा ने गणेशोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी

महाराष्ट्र समाज ,आगरा द्वारा आयोजित ,तीन दिवसीय गणेशोत्सव में दूसरे दिन भारतीय जन नाट्य संघ(इप्टा),आगरा ने दिलीप रघुवंशी के निर्देशन में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ग्रांड होटल,आगरा कैंट में दी।
सर्वप्रथम गणेश भगवान की आरती की गई,इसके बाद इप्टा आगरा ने नाट्य पितामह राजेंद्र रघुवंशी रचित गणेश वंदना_हे शुभ वदन गौरी नंदन,शत शत करें प्रणाम तुझे/रंग जमादे संग जमादे,सकल कला का ज्ञान तुझे,का गायन किया।गीतकार शैलेन्द्र का समूह गीत_तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर/ अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला जमीन पर,मराठी गीत भी प्रस्तुत किया गया।हिमाद्रि हंडियेकर ने मराठी गणेश वंदना एवं हिंदी गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार एवं समाज सेवी अरुण डंग एवं रंगकर्मी व शिक्षाविद प्रोफेसर ज्योत्स्ना रघुवंशी का स्वागत, महाराष्ट्र समाज के पूर्व अध्यक्ष अभय पोताडे़ ने किया।इस अवसर पर ज्योत्स्ना रघुवंशी ने कहा भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा आगरा और महाराष्ट्र समाज आगरा का संबंध राजेन्द्र रघुवंशी के समय से बहुत प्रगाढ़ रहा है।1893 में लोकमान्य तिलक ने गणेशोत्सव को घरों से निकाल कर सार्वजनिक स्वरूप दिया और बहुसंख्यक समुदाय को आजादी की लड़ाई से जोड़ा। अंग्रेज़ों की सारी रोकथाम विफल हो गई और समाज के अमीर गरीब,सभी जाति के लोग आजादी की लड़ाई में शामिल हुए। गणेशोत्सव धार्मिक आयोजन से ऊपर समाज की जागरूकता का माध्यम बन गया। इप्टा और महाराष्ट्र समाज ने इस परम्परा का निर्वाह किया और तमाम लोक परम्परा से जुड़े कार्यक्रम नये कलेवर में प्रस्तुत हुए।कई दफा बाहर से कलाकार आए जिनमें शाहीर अमर शेख का नाम प्रमुख है।

हास्य नाटक “ज्योतिष के चमत्कार” नाटक का प्रभावी मंचन हुआ। इस नाटक के लेखक_घनश्याम गोयल एवं दिलीप रघुवंशी हैं। नाट्य निर्देशन दिलीप रघुवंशी ने किया।नाटक में भाग लेने वाले कलाकार_ असलम खान, पार्थो सेन,जय कुमार,सूर्य देव,समीर थे। मेकअप कुमकुम रघुवंशी ने किया। संगीत निर्देशक परमानंद शर्मा,भगवान स्वरूप,सूर्य देव ने अपने अपनी एकल गायकी_ गजल,मल्हार,मराठी ,सूफी, उपशास्त्रीय गीत प्रस्तुत किए गए।ढोलक पर संगत राजू ने की।

अरुण डंग ने महाराष्ट्र समाज,आगरा की ओर से इप्टा आगरा के कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट किए।यशस्विनी सोवनी का उत्कृष्ट मंच संचालन एवं प्रमुख सहयोग निरंजन पराड़कर, नितिन सोवानी, दिवाकर मोखरीवाले का रहा। आभार प्रगट किया नेत्ररोग विशेषज्ञ डा प्रदीप साने ने।गणेश उत्सव का समापन गोपाल दास नीरज के गीत_इसीलिए तो नगर नगर बदनाम हो गए मेरे आंसू,से किया गया।
इस अवसर पर विशेष रुप से उपस्थिति थे_डॉ. अविनाश चिवटे,अशोक करमरकर, सुरेश करमरकर, श्रीमती नम्रता पराड़कर, सुनीता मोखरीवाले, डॉ. स्मिता साने, अंजलि करमरकर, डॉ. नीता चिवटे,प्रभाकर शेंडेकर आदि।

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Rekha Singh

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