कार्यक्रम

परम रसमयी व सच्चिदानंदमयी थीं ब्रज गोपिकाएं : आचार्य रसिक वल्लभ नागार्च

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।छीपी गली स्थित प्रिया वल्लभ कुंज में श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन उपलक्ष्य में सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा रसोत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ चल रहा है।जिसमें व्यासपीठ से भागवताचार्य रसिक वल्लभ नागार्च अपनी अमृतमयी वाणी के द्वारा सभी भक्तों-श्रृद्धालुओं को श्रीमद्भागवत की कथा श्रवण करा रहे हैं।
रसोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व ऊर्जा मंत्री व मथुरा-वृन्दावन के यशस्वी विधायक पंडित श्रीकांत शर्मा ने श्रीमद्भागवत ग्रंथ व व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
व्यासपीठ से भागवताचार्य रसिक वल्लभ नागार्च ने गोपी गीत की महिमा बताते हुए कहा कि यह शरद पूर्णिमा की रात्रि की हुई महारास लीला का प्रमुख आख्यान है।भगवान श्रीकृष्ण के समान ही गोपिकाएं भी परम रसमयी व सच्चिदानंदमयी थीं।यदि गोपिकाएं गोपी गीत का गायन नहीं करती तो श्रीकृष्ण महारास नहीं करते।वस्तुत: गोपी गीत से ही महारास का उद्भव हुआ था।
विधायक पंडित श्रीकांत शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी रूपों में अपनी लीलाओं के माध्यम से जो संदेश दिए हैं, वे हम सभी को अपने जीवन में धारण करने चाहिए।इसी में हम सबका कल्याण है।
इस अवसर पर श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के अध्यक्ष आचार्य विष्णुमोहन नागार्च ने पंडित श्रीकांत शर्मा का ठाकुरजी का पटुका प्रसादी भेंट कर व श्रीजी की चुनरी ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया।
महोत्सव में वरिष्ठ साहित्यकार व श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के समन्वयक डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, पार्षद डॉ. रूप किशोर वर्मा (रूपन), पार्षद वैभव अग्रवाल, पंडित रासबिहारी मिश्रा, पंडित जुगल किशोर शर्मा, श्रीमती कमला नागार्च, प्रकाश अग्रवाल, अनन्तराम सोनी, विपिन अग्रवाल, अनिल भुड्डी, हित कल्याणी (आस्ट्रेलिया), रामनारायण सैनी, आचार्य ललित वल्लभ नागार्च, तरुण मिश्रा, भरत शर्मा, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, जितेंद्र सैन, हितवल्लभ नागार्च, संगीतज्ञ सुरेश भैया, अजय, मनीष, अर्पित, सोनू आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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