कहानी

लोक कल्याण के लिए प्रकटे थे श्रीपाद बाबा महाराज: स्वामी अवशेषानंद

वृन्दावन।मोतीझील स्थित श्रीराधा उपासना कुंज में चल रहे संत प्रवर श्रीपाद बाबा महाराज के 25 वें समाराधन महोत्सव के तीसरे दिन सन्त-विद्वत सम्मेलन का आयोजन अखण्डानन्द आश्रम के अध्यक्ष स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती महाराज के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ। जिसकी अध्यक्षता गीता आश्रम के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अवशेषानंद महाराज ने की।
महामंडलेश्वर स्वामी अवशेषानंद महाराज ने कहा कि श्रीपाद बाबा महाराज का प्राकट्य लोक कल्याण के लिए हुआ था।वह सर्वहिताय व सर्वजन सुखाय के हिमायती थे।
विरक्त वैष्णव परिषद के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीपाद बाबा महाराज ने ब्रज अकादमी की स्थापना ब्रज संस्कृति के सरंक्षण व उन्नयन के लिए की थी। वह इस संस्था के माध्यम से एक ऐसी संस्कृति विकसित करना चाहते थे जो कि सभी के लिए कल्याण कारी हो।इसीलिए सारे विश्व के शोधार्थी ब्रज अकादमी में अपना शोध पूर्ण करने के लिए प्रायः वृन्दावन आते रहते थे।
कांग्रेस विधान मंडल दल के पूर्व नेता व पूर्व विधायक प्रदीप माथुर एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीपाद बाबा महाराज पर सभी राजनैतिक दलों की आस्था व श्रद्धा थी। इसीलिए विभिन्न दलों के राजनेता बाबा महाराज के आशीर्वाद के लिए उनके पीछे भागते थे।
श्रीराधा उपासना कुंज के महन्त बाबा सन्तदास महाराज व ब्रज अकादमी के सचिव साध्वी डॉ राकेश हरिप्रिया ने कहा कि श्रीपाद बाबा महाराज ब्रज चेतना के उन्नायक थे। उन्होंने शिक्षा व संस्कृति के क्षेत्र में जिन प्रतिमानों की स्थापना की वे शिक्षाविदों, धर्माचार्यों, वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के लिए प्रेरणाप्रद हैं।
आकाशवाणी के पूर्व उदघोषक पंडित राधाबिहारी गोस्वामी व डॉ. रामदत्त मिश्रा ने कहा कि श्रीपाद बाबा महाराज की गौ माता की सेवा में अपार श्रद्धा थी। इसीलिए उन्होंने न केवल ब्रज अकादमी परिसर में विशाल गौशाला की स्थापना की अपितु समूचे ब्रज की विभिन्न गौशालाओं के विकास में सहयोग दिया।
श्रीराधा नाम प्रचार ट्रस्ट की अध्यक्ष एवं प्रख्यात भजन गायिका दीदी आरती शर्मा (किशोरी प्रिया) ने अपने अनेक रसीले भजन प्रस्तुत करके सभी को भाव विभोर कर दिया। जिनमें से एक के बोल इस प्रकार थे “मुझे अपना प्यार देदो करुणामयी राधे। करुणामयी, कृपामयी, मेरी दयामयी राधे।………..”
इस अवसर पर महन्त मधुमंगल शरण शुक्ल, सेवानंद ब्रह्मचारी, संगीताचार्य स्वामी देवकीनंदन शर्मा, नीलकमल,आचार्य नेत्रपाल शास्त्री,रामकुमार त्रिपाठी, महामंडलेश्वर राधाप्रसाद देव जू महाराज, चतु:सम्प्रदाय के श्रीमहन्त फूलडोल बिहारी दास जी महाराज,महन्त मोहिनी बिहारी शरण,युवा साहित्यकार राधाकांत शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
सांयकाल 500 से भी अधिक निर्धन,निराश्रित,अनाथ एवं भगवदाश्रित महिलाओं को ऊनी शॉल,दक्षिणा,फल व मिष्ठान आदि वितरित किए गए। साथ ही विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रतियोगिता में भाग लिया। जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावान विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।रात्रि को रासाचार्य स्वामी राधावल्लभ महाराज के निर्देशन में रासलीला का अत्यंत नयनाभिराम, चित्ताकर्षक व भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।
डॉ. गोपाल चतुर्वेदी

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Rekha Singh

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