डॉ.बचन सिंह सिकरवार

अन्ततः सशस्त्र विद्रोह के बाद पश्चिम अफ्रीकी देश में माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता को अपने पद से इस्तीफा देने को मजबूर होना ही पड़ा, जिन्हें 18अगस्त,मंगलवार देर रात को गोलीबारी करते हुए विद्रोही सैनिकों ने उन्हें और प्रधानमंत्री बुबौ सीस को उनके राजधानी बमाको स्थित आवासों को घेर कर बन्धक बना लिया था और बमाको पर कब्जा कर लिया। वैसे राष्ट्रपति के कार्यकाल के तीन साल बाकी थे,पर उनके इस्तीफे की माँग को लेकर पिछले कई महीने विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इस घटनाक्रम पर शायद ही किसी को आश्चर्य हुआ होगा, क्योंकि यह अनायस नहीं हुआ है। इस देश में पहले से जिहादी विद्रोह का सामना कर रहा था। इस जिस बैरक के सैनिकों से विद्रोह किया है,इस बैरक के सैनिकों ने सन् 2012में तत्कालीन राष्ट्रपति अमडोउ तौमानी टौरे का तख्ता पलट कर दिया था। पिछले तख्ता पलट के बाद से ही इस मुल्क में इस्लामिक कट्टरपन्थियों का दबदबा लगता बढता़ रहा है। अब संयुक्त राष्ट्र तथा फ्रान्स की ओर से हालात को नियंत्रण करने की निरन्तर प्रयास किये गए, किन्तु इससे कोई लाभ नहीं हुआ। अब एक ओर से राष्ट्रपति के त्यागपत्र से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी खुश हैं,दूसरी दूसरे देश माली के हालात से चिन्तित हैं।
पश्चिम अफ्रीकी देश माली ऐसा देश है जिसका कोई भी भाग समुद्र से मिला हुआ नहीं है। इसके उत्तर में अल्जीरिया ,पश्चिम में मोरितानिया और उत्तर-पूर्व में नाइजर है। इसका क्षेत्रफल- 12,40,192 वर्ग किलोमीटर है। इसकी जनसंख्या- 1, 45, 17, 176 से अधिक है, जो इस्लाम और कबायली मजहब की अनुयायी और बम्बारा, अन्य अफ्रीकी भाषाएँ बोलती हैं, जबकि शासकीय भाषा ‘फ्रेंच’ है। इसकी मुद्रा ‘माली फ्रेंक’ है। यह देश 22 सितम्बर,सन् 1960 फ्रान्स की दासता से स्वतंत्र हुआ। प्राकृतिक सम्पदा की दृष्टि से माली निर्धन है। केवल 20प्रतिशत भूमि पर खेती होती है। मुख्य फसलें धान, ज्वार, बाजरा और मूंगफली है। पशुपालन महत्त्वपूर्ण उद्यम है। चमड़े और खाल का मुख्य व्यवसाय है।नदियों में मछली पकड़ने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है और सूखी मछलियों का खूब निर्यात किया जाता है।

इस बीच माली स्थित भारतीय राजदूत अंजनी कुमार सहाय ने कहा कि उनके दूतावास के सभी सदस्य और भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। सभी को घर लौटने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही उन्हें अपने घर से बाहर नहीं निकलने का निर्देश दिया है। पिछले कई सालों से दुनिया भर के कई मुल्कों में इस्लामिक कट्टरपन्थियों की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं,उनमें माली भी शामिल है। इस मुल्क की अशान्ति और राजनीतिक अस्थिरता के इन्हीं ताकतें की सक्रियता है,इन पर नियंत्रण और सख्ती की जरूरत है। ऐसा किये बगैर माली के हालात सुधरने की उम्मीद बेमानी होगी।






















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