राधेबाबू अग्रवाल

कोरोना विषाणु से फैली महामारी से भारत समेत विश्वभर के देशों को जनधन की भारी क्षति हो रही है और न जाने कब तक यह होती रहेगी? इस महामारी के दुष्प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से वर्तमान में अपना देश लॉकडाउन के तीसरे दौर से गुजर रहा है। इस दौरान संक्रमण रोकने को देशभर में हर तरह की आर्थिक गतिविधियाँ और लोगों को अपने घरों में रहने को कहा गया है। इससे जहाँ देश का आर्थिक विकास का पहिया थम गया और लोगों विशेष रूप से आर्थिक रूप कमजोर लोगों/श्रमिकों आदि को बहुत अधिक कष्ट उठाना पड़ रहा है,वहीं इस लॉकडाउन के कारण देश के वातावरण यानी वायु और कई नदियों का प्रदूषण में बहुत सुधार हुआ। यहाँ तक गंगा,यमुना सहित कई दूसरे नदियों का जल पीने और आचमन योग्य हो गया है। वायु प्रदूषण कम होने से सौ किलो मीटर स्थित शहरों जैसे अम्बाला, सहारनपुर से हिमालय दिखायी दे रहा है। जो गंगा का जल करोड़ों खर्च करने पर भी उतनी स्वच्छ नहीं हुआ, वह लॉकडाउन में कानपुर और दूसरे शहरों के कारखाने बन्द होने से हो गया है, जबकि अब भी कई शहरों के गन्दे पानी के नाले गंगा, यमुना में गिर रहे हैं।
गंगा, यमुना और दूसरी नदियों के जल के शुद्ध से होने से यह लगता है कि हमारी सरकारी मशीनरी की खराब निगरानी/घूसखोरी की वजह से ये नदियाँ गन्दी बनी हुई हैं,क्यों कि भ्रष्टाचार के कारण यह अपना काम को सही ढंग से नहीं कर रही है।
ऐसी स्थिति में सरकार को गंगा,यमुना समेत सभी प्रमुख नदियों को स्वच्छ रखने की जिस मशीनरी को जिम्मेदारी सौंपी गयी है, उसे यह सख्त हिदायत दी जाए,कि किसी भी कीमत वह प्रदूषणकारी कारखानों, टेनरियों का अशुद्ध जल इन नदियों में न कर गिरने दे।





















This Month : 12604
This Year : 118644
Add Comment