देश-दुनिया

क्यों दुनिया की गले की नस बना हुआ है होर्मुज जलडमरूमध्य

डॉ.बचन सिंह सिकरवार
हाल में ईरान के नए सर्वाेच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के विरुद्ध के दौरान तेल और गैस का पारगमन का सबसे महत्त्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य का मार्ग‘ शत्रु राष्ट्रों के लिए बन्द रखने की जो धमकी दी है,उसे देखते हुए पश्मिेशिया युद्ध के कारण जल्दी के विश्व के अधिसंख्यक देशों में तेल तथा गैस का भीषण संकट उत्पन्न होने के पूरे आसार दिखायी दे रहे हैं,इससे अपना देश भी प्रभावित हो रहा है और भविष्य में इससे अधिक भी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। यद्यपि ईरान ने भारत के तेल टैंकरों का होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से गुजरने की स्वीकृति दी हुई है, तथापि इस मार्ग से आने-जाने तेल टैंकरों पर युद्ध के चलते तेल तथा गैस संकट अभी टला नहीं है। ईरान की यह धमकी दी है कि विश्व दो सौ डॉलर प्रति बैरल कच्चा तेल खरीदने को तैयार रहे । इसके पीछे उसका होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग पर उसका दबदबा ही है।ईरान ने एक ओर अपने पड़ोसी तेल उत्पादक देशों की तेलशोधक/रिफाइनारियों पर बम और ड्रोन से क्षति पहुँचा रहा है तो कुछ तेल टैंकरों पर वह हमला करके यह दिखा भी चुका है कि उसकी इजाजत के बिना कोई यहाँ गुजरना किसी हालत में सम्भव नहीं है। इसकी वजह से भारत समेत कई मुल्कों के दर्जनों तेल से भरे टैंकर यहाँ खड़े हुए हैं। इतना ही नहीं,खाड़ी देशों ने अपना तेल और गैस उत्पादन बन्द कर दिया है या कम कर दिया है। इससे विश्व मे ंतेल और गैस संकट बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा है कि मीनाब में अमेरिकी हमले में मारी गई 165 से अधिक स्कूली छात्राओं और दूसरे लोगों की मौतों का बदला लेने तक जंग जारी रखने की बात कही है। इसके लिए ईरान अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले तेज करने के साथ ऐसे नए मोर्चे खोलने की बात कही है, जिनका उसके दुश्मनों ने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा।इससे स्पष्ट है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को इस जंग में दबाव डालने का इस्तेमाल करने की रणनीति अपना रहा है।वैसे वह ऐसा पहली बार नहीं कर रहा है, इससे पहले की जंगों में भी इसका इस्तेमाल कर चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव और टैंकरों पर हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुँच गई है।अमेरिक ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि फिलहाल अमेरिकी नौसेना इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को सुरक्षा देने की स्थिति में नहीं है वस्तुतः होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग का अखाड़ा बना हुआ है,क्योंकि सऊदी अरब,संयुक्त अरब अमीरात(यूएआइ), कतर,बहरीन,कुवैत,ईरान,इराक आदि तेल उत्पादक इसके मुल्क इसके आसपास स्थित है और उनका तेल तथा गैस इसके जरिए दुनियाभर का भेजा जाता है। इसी रास्ते से भारत,चीन, दक्षिण कोरिया,जापान को तेल और गैस आते हैं। भारत को आयात होने वाले तेल का 50प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में जानना समीचीन होगा,जो विश्व के तेल और गैस के निर्यात की गले की नस बना हुआ है। इसका कारण है कि यह विश्व का सबसे महत्त्वपूर्ण तेल और गैस पारगमन मार्ग है,तो फारस की खाड़ी को ओमन की खाड़ी से जोड़ता है। यह ईरान के उत्तर और ओमन/संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) के दक्षिण में स्थित है। होर्मुज जलडमरूमध्य की चौड़ाई सबसे संकरे स्थान पर कोई 39किलो मीटर मीटर है। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20-25 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है,जिससे यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रणनीतिक है। रणनीतिक महत्त्व-यह खाड़ी देशों(सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर, यूएई, ईरान)से तेल और प्राकृतिक गैस(सीएनजी) के निर्यात का एकमात्र समुद्री रास्ता है।
जहाँ तक होर्मुज जलडलमरूमध्य की भौगोलिक स्थिति का प्रश्न है तो यह करीब 160-166 किलो मीटर लम्बा है। इसके संकरे होने के कारण यहाँ जहाजों की आवाजाही के लिए निर्धारित शिपिंग लेन बनी हुई है,जो बहुत ही कम चौड़ी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के मुख्य उपयोग और महत्त्व कई कारणों से है जैसे पहला-तेल और एलएनजी का परिवहन-यह सऊदी अरब,ईरान, इराक,कुवैत और कतर जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के लिए अपना कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस विश्वभर में भेजन का एकमात्र समुद्री मार्ग है। दूसरा-वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति- वैश्विक ऊर्जा का माँग एक बड़ा हिस्सा (लगभग एक पाँचवाँ ),प्रतिदिन इस संकरे रास्ते ये गुजरता है।तीसरा -डिजिटल/इण्टरनेट संचार- यह केवल तेल नहीं,बल्कि समुद्री के नीचे से गुजरने वाले अहम इण्टरनेट केबलों के लिए भी एक है डिजिटल कारिडोर है जो इण्टरनेट कनेक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य(स्टेªट) को ‘मौत की घाटी ‘(डेथ वैली)बनाने में लगा ईरान बिछा रहा समुद्री सुरंग(माइंस) ,अमेरिका सैना ने ईरानी जहाजों को किया तबाह -ईरान,ने दुनिया के सबसे अहम अन्तरराष्ट्रीय एनर्जी चोक पॉइण्टस में से कहे जाने वाले हार्मुज जलडमरूमध्य के माइंस बिछाना शुरू कर दिया है।इसी 11मार्च को अमेरिकी सेना ने बताया है कि उसने ईरान के 16 माइंस बिछाने वाले जहाजों को नष्ट किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स(आइआएजी)ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज ईरान की इजाजत के बिन आगे नहीं बढ़े।
ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को अवरूद्ध करने के पीछे उसका इरादा अमेरिका और इजरायल पर दबाव बनाना है, ताकि उस पर हमले बन्द करने को मजबूर हो। ईरान यह भी दिखा रहा है कि पश्मिेशिया से तेल और गैस की आपूर्ति रोकने के साथ ही वह युद्ध को लम्बा खींचना चाहता है। दरअसल, अमेरिका ने दुनिया के सामने ऊर्जा आपूर्ति का संकट पैदा करने का कार्य किया है। वैसे अमेरिका को यह पहले दिन से यह अन्दाज होना चाहिए था कि ईरान पर हमला करने और युद्ध को लम्बा खिंचने की स्थिति में तेल और गैस का संकट उत्पन्न होगा। उससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी। इधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने युद्ध समाप्त करने के तीन शर्ते रखीं हैं,जो ये हैं-अमेरिका और इजरायल को ईरान के अधिकारों को मान्यता देनी होगी, युद्ध से हुई क्षति की पूर्ति करनी होगी। भविष्य में किसी भी हमले के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय गारण्टी देनी होगी। इन्हें स्वीकार करने की अपेक्षा न अमेरिका से और न इजरायल से।
बहरहाल,ऐसी ही स्थिति बन रही है। भारत सहित कई मुल्कों को दूसरी स्रोतों से तेल एवं गैस प्राप्त करना दुष्कर हो रहा है।उनके दाम बढ़ रहे हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान को लक्ष्य कर जो संकट पैदा किया ,उसके हल के लिए वह बहुत अधिक तत्पर नहीं दिखता। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को कुछ ही दिन में घुटने पर लाने के बड़े-बड़े दावे किये थे ,पर वे इजरायल और खाड़ी देशों में उसके प्रत्युत्तर में हो हमले से भी उनका बचाव तक नहीं कर पा रहे हैं। उनका यह दावा भी सही नहीं लग रहा है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से तेल एवं गैस टैंकरों का सुरक्षित निकलना निश्चित करेगा। अब देखना है कि आने वाले समय में कहाँ तक और कब तक अमेरिका-इजरायल या खुद ईरान ही होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को पुनःसुचारू करने में सफल होते हैं।

सम्पर्क-डॉक्टर बचन सिंह सिकरवार वरिष्ठ पत्रकार, 63ब,गाँधी नगर,आगरा-2820003 मोबाइल नम्बर-9411684054

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