(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)
वृन्दावन। मथुरा रोड़ स्थित वात्सल्य ग्राम में दीदी मां साध्वी ऋतंभरा का त्रिदिवसीय जन्मोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ। जिसके अंतर्गत संविद गुरुकुलम् गल्र्स सैनिक स्कूल के सभागार में देश भर से पधारे शिष्यगणों एवं परमशक्ति पीठ के सहयोगियों ने अपने श्रद्धा-सुमन उनके श्रीचरणों में समर्पित करते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएँ प्रकट कीं। जिसके अन्तर्गत वैशिष्ट्यम एवं बी टी टी ए की छात्राओं ने महाभारत की संक्षिप्त नृत्य नाटिका के माध्यम से द्रौपदी की विवशता, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उनके लाज बचाने एवं फिर दुःशासन वध के बाद स्त्री सशक्तिकरण का संदेश दिया।
कृष्णा ब्रह्मरतन विद्या मन्दिर की छात्राओं ने भगवान शिव पर आधारित नृत्य नाटिका से वातावरण को भावविभोर कर दिया लोगों तालियों से हाल गूँजने लगा।
ऑस्ट्रेलिया निवासी साहित्यकार श्रीमती सोमा नायर ने अपनी कविता के माध्यम से दीदी माँ जी का यशोगान करते हुए भारत की स्त्री शक्ति के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया।
पाकिस्तान पीड़ित हिन्दू समाज को भारत में बसाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहे जयपुर के प्रख्यात चिकित्सक डाॅ.ओमेन्द्र रत्नू ने माँ के विभिन्न भूमिकाओं के प्रति अपनी अत्यन्त ही मनोहारी “मेरे मनोभाव” वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से पूज्या दीदी माँ जी के चरणों में अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुए उन्हें जन्मोत्सव की बधाई प्रदान की।
सिरसा से पधारे हुए विश्वविख्यात भजन गायक किशन भैया के भजनों ने वातावरण को राधामय कर दिया।
परमशक्ति पीठ के सहयोगी एवं प्रख्यात शिक्षाविद् राजीव गुप्ता के आगरा में संचालित होने जा रहे शिक्षाकेन्द्र ‘संध्या गुरुकुलम्’ के ब्रोशर का विमोचन भी पूज्या दीदी माँ जी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।
समारोह को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि हमने देखा कि लोग किसी की काया का वध कर देते हैं। लोग किसी के प्रति रुष्ट हो जाते हैं तो उसको कहते हैं कि दिल करता है थप्पड़ मार दें, दिल करता है गोली से भून दें। इतना क्षुद्र विचार भी आता है द्वेष की वजह से। एक बैर होता है कि वह शरीर ही खत्म करना चाहता है लेकिन एक और तल पर भी बैर या प्रेम होता है। वो मन के तल पर होता है। हमने शरीर के तल पर तो देखा कि सास पहले बहू को जलाती थी अब बहुए कुछ अलग करामात करती हैं। पहले के समय में वो स्टोव बहू को ही पता नहीं क्यों जलाता था, सास, ननद को कैसे छोड़ देता था। अब वो उसकी दूसरी प्रतिक्रिया हो रही है। तो ये तो हमने बहुत सुना है और यहीं तक नहीं, अगर त्रेता युग या द्वापर युग की बात करें तो वहां भी तो हम देख रहे हैं कि उस दृष्टि से अगर हम आकलन करें तो सुग्रीव को बाली के विरुद्ध या बाली को सुग्रीव के विरुद्ध देखते ही हैं।
मनसा-वाचा-कमणा हम एक नहीं रह पाते। यह थोथा आदर्शवाद है। कोई प्रवचनों से बदल नहीं जाएगा। जब आपकी आंतरिक ऊर्जा का उर्ध्वगमन होगा, अपनी आंतरिक ऊर्जा का सम्मिलन करके आपकी शक्ति शिव से मिलेगी, तभी आप आंतरिक आनंद से भरेंगे। फिर आपके भीतर से जो निकलेगा वो सच्चा होगा, पूर्ण होगा आनंददायी होगा। आडंबर पाखंड हमको बोझिल करते हैं और जिंदगी की सच्चाई हमको हल्का-फुल्का करती है।’
इस अवसर पर श्रीनाभापीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज, संजय भैया, साक्षी चैतन्य सिन्धु, साध्वी शिरोमणि, स्वामी सत्यशील, पूर्व मंत्री रवि कान्त गर्ग, महामंडलेश्वर स्वामी राधाप्रसाद देव जू महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी आदित्यानंद महाराज, सन्त प्रवर रामदास महाराज, प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, महंत मोहिनीबिहारी शरण महाराज, महंत देवानंद महाराज,आचार्य बद्रीश महाराज, सौरभ गौड़, आशीष गुप्ता, निवेदिता, आई.सी.अग्रवाल, राजीव गुप्ता, अशोक सरीन, डाॅ. जनक आनन्द, ऋषव अवस्थी, आई.जी.एच.के.शर्मा, श्रीमती वन्दना तिवारी एवं श्रीमती सीमा शर्मा, मीनाक्षी अग्रवाल सहित अनेक गणमान्यजन इस आयोजन में सम्मिलित हुए।संचालन डॉ उमाशंकर राही ने किया।






















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