कार्यक्रम

वात्सल्य ग्राम में त्रिदिवसीय वात्सल्य महोत्सव धूमधाम से प्रारंभ

 

प्रथम दिन सम्पन्न हुए कवि सम्मेलन में प्रख्यात कवियों ने किया काव्य पाठ

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन। मथुरा रोड़ स्थित वात्सल्य ग्राम में त्रिदिवसीय वात्सल्य महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ प्रारंभ हुआ।महोत्सव के प्रथम दिन प्रख्यात सन्त, पद्म विभूषण साध्वी रितंभरा ने दीप प्रज्जलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया।कवि सम्मेलन में सर्वप्रथम आगरा से पधारी डॉक्टर रुचि चतुर्वेदी ने सरस्वती वंदना की। तटपश्चात सुहाग नगरी फिरोजाबाद से आए गीतकार यशपाल यश ने अपने गीतों की सरिता बहाते हुए कहा कि- लक्ष्य जब तक कनक के हिरन हो गए। देखिए भाग्य सीता हरण हो गए।। जिनका बचपन नदी में बहाया गया, युग के कुरुक्षेत्र में वह करण हो गए।।
डीग (राजस्थान) से पधारे हास्य व्यंग्य के कवि सुरेंद्र सार्थक ने श्रोताओं को गुद-गुदाते हुए कहा कि ”खुले आकाश में अपनी कमाई छोड़ देते हैं। मठा से पेट भरते हैं मलाई छोड़ देते हैं। अगर तुम झूठ भी कह दो मवेशी खेत में तेरे. कड़कती ठंड में झट से रजाई छोड़ देते हैं।।”
दिल्ली से पधारे वीर रस के कवि मनवीर मधुर ने कहा कि “एक ध्वजवाहक सनातन परंपरा का नाम भी लगेगा तुम्हें शुद्ध स्वर्ण सा खरा। प्रेम भक्ति शक्ति वात्सल्य का ही दिव्य रूप चाहते हो तो देख लेना दीदी मां रितंभरा।।”
आगरा से आई डॉक्टर रुचि चतुर्वेदी ने गीतों की गंगा बहाते हुए कहा कि “जिन चरणों में जाकर हमको स्वर्ग धारा मिल जाती है। जिनके ममतामई प्रेम को सारी सृष्टि गाती है।।जीवन सुख वात्सल्य ग्राम रज मस्तक चंदन करते हैं। आओ हम सब मिलकर दीदी मां को वन्दन करते हैं।।”
नोएडा से पधारे हास्य कवि वेद प्रकाश वेद ने श्रोताओं को हंसाकर लोटपोट कर दिया कहा कि “इस मिलावट के हमने
ऐसे ऐसे चमत्कार भुगते हैं।काली मिर्च बोओ तो पपीते उगते हैं।”
दिल्ली के वीर रस के कवि गजेंद्र सोलंकी ने कहा कि “नए युग की कहानी का नया उल्लास लिखना है, दिलों की धड़कनों पे प्रेम का अहसास लिखना है।बदलते वक्त की आहट सुनाई तो साँस यूँ बोली,हमें भारत की धरती पर
सुखद मधुमास लिखना है।”
सिंगरौली से पधारी श्री मती विजयलक्ष्मी संवेदना ने कहा कि “उपनिषद का ज्ञान हो तुम या कि वेदों की ऋचाएँ,
तुम मिले पुलकित हुई है सृष्टि की सारी दिशाएंll”
गाजियाबाद से पधारे राजनीति पर कटाक्ष करते हुए रुप चौधरी ने कहा कि “गंगा जैसी कभी थी पवित्र देखिएगा मित्र, होगई शराब जैसी आज राजनीति है।
कहीं बड़े लोगों की तिजोरी में हुई है बंद, कोठे पे भी ठुमका लगती राजनीति है।
शेखर,पटेल और सुभाष को भी भूलगई, आज भ्रष्टाचार की सहेली राजनीति है।।”
डॉ. उमाशंकर राही ने संचालन करते हुए कहा कि “समय आ गया जातिवाद के सारे भेद मिटाने का। समय आ गया हिदुस्तां को हिन्दू राष्ट्र बनाने का।।”
इस अवसर पर आई. सी. अग्रवाल एवं महेश खण्डेलवाल, रुप चौधरी ने समस्त कवियों को

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