उत्तर प्रदेश

प्राचीन मदन मोहन मन्दिर की जर्जर दीवार को संरक्षित करने की शासन-प्रशासन से मांग

 

वृन्दावन। मदन मोहन मन्दिर के समीप स्थित राधा केलि कुंज के प्रबंधक एवं प्रख्यात रासाचार्य स्वामी कुंजबिहारी शर्मा ने प्राचीन मदन मोहन मन्दिर की जर्जर दीवार को संरक्षित करने की शासन-प्रशासन से मांग की है।साथ ही वर्तमान की स्थिति को देखते हुए किसी अनहोनी की आशंका पर चिंता जताई है।
ज्ञात हो कि नगर के अति प्राचीन व सप्त देवालयों में प्रमुख मदन मोहन मंदिर, वृन्दावन (मथुरा) की एक संरक्षित दीवार, जो राधा केलि कुंज आश्रम एवं एक समाधि मंदिर से लगी हुई है, की स्थिति अत्यंत असुरक्षित बनी हुई है। यह विषय पिछले दो दशकों से अधिक समय से लगातार शिकायतों, दीवार के गिरने तथा दोषपूर्ण मरम्मत के बावजूद अब तक पूर्ण रूप से हल नहीं हो सका है।
दिनांक 01 मई 2003 को सर्वप्रथम पुरातत्व विभाग, आगरा को लिखित शिकायत देकर अवगत कराया गया था कि प्राचीन मंदिर की उक्त दीवार अत्यंत जर्जर अवस्था में है तथा इसके गिरने की प्रबल संभावना है। इसके पश्चात 17 जून 2003 को पुनः स्मरण पत्र भेजा गया, किंतु कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप, जैसा कि आशंका व्यक्त की गई थी, दिनांक 11 जुलाई 2003 को दीवार का एक भाग गिर गया।जिससे समीप स्थित समाधि मंदिर, भवन तथा संपत्ति को क्षति पहुँची।
इस दुर्घटना का समाचार अगले ही दिन 12 जुलाई 2003 को दैनिक जागरण समाचार पत्र के “वृन्दावन आस-पास” स्तम्भ में “मदन मोहन मंदिर की दीवार ढही” शीर्षक से प्रकाशित हुआ। जिसमें विभागीय लापरवाही का स्पष्ट उल्लेख किया गया। इसी दिनांक को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा के समक्ष भी लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात 19 जुलाई 2003 को सभी संबंधित दस्तावेजों एवं छायाचित्रों सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मुख्यालय, नई दिल्ली तथा संबंधित मंत्रालय को विस्तृत अभ्यावेदन भेजा गया।
हालाँकि इसके बाद दीवार का पुनर्निर्माण कराया गया, परंतु वह तकनीकी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण सिद्ध हुआ। अतः दिनांक 27 जुलाई 2005 को अधीक्षण पुरातत्वविद्, ए.एस.आई., आगरा तथा केंद्रीय पर्यटन/संस्कृति मंत्री को पुनः शिकायतें भेजी गईं।जिनमें घटिया निर्माण, सीमेंट अनुपात की कमी, जल निकासी की व्यवस्था न होना, पानी का रिसाव तथा दीवार के समीप नियमित रूप से पौधों को पानी देने जैसी गंभीर त्रुटियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया। इसी प्रकार 30 मई 2009 को पुनः अभ्यावेदन प्रस्तुत कर भूमिगत पाइपलाइन से हो रहे जल रिसाव एवं दीवार के कमजोर होने की चेतावनी दी गई।बावजूद इसके यह समस्या बनी रही। अप्रैल 2022 में सुनील कुमार श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी) द्वारा भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई। जिसमें 11 जुलाई 2003 की दीवार गिरने की घटना का उल्लेख करते हुए वर्तमान में भी दरारों, सीवेज एवं उपेक्षा के कारण दीवार के पुनः गिरने की आशंका व्यक्त की गई।
उन्होंने बताया कि मन्दिर की दीवार की वर्तमान स्थिति अत्यंत गंभीर है। दिनांक 13 दिसंबर 2025 को लिया गया संलग्न छायाचित्र दीवार में पड़ी गहरी लंबवत संरचनात्मक दरार को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।जिससे चिनाई के अलग-अलग होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है और किसी भी समय पुनः दुर्घटना घटित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यह दीवार समाधि मंदिर एवं लोगों की आवाजाही वाले क्षेत्र के समीप स्थित है।जिससे जन-सुरक्षा, धार्मिक धरोहर तथा संरक्षित स्मारक को गंभीर खतरा है।

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