कार्यक्रम

सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में पधारे प्रख्यात धर्मांचार्य ब्रह्मर्षि रमेश भाई ओझा

 

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।कालीदह क्षेत्र स्थित राधा कृपा आश्रम में लाला सट्टनलाल अग्रवाल परिवार (मुम्बई) के द्वारा ठाकुरश्री ब्रजवल्लभ लाल महाराज एवं सद्गुरुश्री सन्त मां ब्रजदेवी जी के पावन सानिध्य में चल रहे सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव में पधारे प्रख्यात धर्माचार्य ब्रह्मर्षि रमेश भाई ओझा ने श्रीमद्भागवत महापुराण का पूजन किया।साथ ही समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत में वस्तुत: भगवान श्रीकृष्ण की समस्त लीलाओं का वर्णन है।श्रीकृष्ण ने बृज में बाल लीलाएं करके समस्त ब्रज वासियों को आनंद प्रदान करते हुए जीव और ब्रह्म के अंतरंग भेद को समाप्त करके एकत्व की शिक्षा प्रदान की। भगवान ने माखन चोरी करके भक्तों को अद्भुत प्रेम और भक्ति का संदेश प्रदान किया।भगवान ने माखन चोरी लीला करके समस्त भक्तों को बताया कि जो भक्त निस्वार्थ भाव से मुझसे प्रेम करता है, तो मैं उसके प्रेम रूपी माखन को प्रेम से ग्रहण करता हूं।
उन्होंने कहा कि भगवान ने ब्रज रज का पान करके समस्त संसार को ब्रज के महत्व के बारे मे शिक्षा प्रदान की।साथ ही पृथ्वी तत्व का शोधन किया तथा यमुना के अंदर बसे हुए प्रदूषण रूपी कालीया को नाथ कर भगवान ने समस्त संसार के भक्तों को ये अद्भुत संदेश प्रदान किया, कि मेरी भक्ति केवल पूजन, पाठ, जप, तप, दर्शन से ही नहीं अपितु प्रकृति की शुद्धि, प्रकृति का संरक्षण एवं प्रकृति की सेवा के द्वारा भी की जा सकती है।
तत्पश्चात सन्तश्री प्रेमधन लालनजी महाराज ने व्यास पीठ से महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध एवं भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की कथा श्रवण कराई।साथ ही भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह की अत्यंत दिव्य व भव्य झांकी सजाई गई।साथ ही विवाह से संबंधित बधाईयों का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन किया गया।
व्यास पीठाधीन श्रद्धेय प्रेमधन लालनजी महाराज ने महारास का प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा कि महारास लीला भगवान श्रीकृष्ण की एक अद्भुत व परम रसमयी लीला है।जिसे उन्होंने असंख्य ब्रजगोपियों के हृदय की अभिलाषा को पूर्ण करने लिए व अभिमानी कामदेव के अभिमान को नष्ट करने के लिए श्रीधाम वृन्दावन के यमुना तट पर शरद पूर्णिमा की रात्रि को किया था।जिसमें उन्होंने अनेकों रूपों में अपनी बांसुरी बजाकर संपूर्ण विश्व को ब्रजमंडल की ओर आकर्षित किया।लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला के दर्शनों के लिए समस्त देवी-देवताओं के साथ भगवान शिव भी ब्रज गोपी का स्वरूप धारण कर श्रीधाम वृन्दावन पधारे थे।
महोत्सव में मुखराई (श्रीराधारानी की ननिहाल) स्थित मुखरा देवी मन्दिर के महंत बाबा यादव शरण महाराज, प्रख्यात साहित्यकार”यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, राष्ट्रपति पुरुस्कार प्राप्त प्रख्यात रासाचार्य स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा, पण्डित रवि शर्मा, स्वामी राधाकांत शर्मा (छोटे स्वामी), कृष्णांश शर्मा, मुख्य यजमान अशोक कुमार अग्रवाल (मुम्बई), श्रीमती ऊषा अग्रवाल, अरविन्द कुमार अग्रवाल, श्रीमती भारती अग्रवाल, अरुण कुमार अग्रवाल, श्रीमती कल्पना अग्रवाल, साध्वी कुंज दासी, साध्वी प्रिया दासी, साध्वी हरि दासी, गुंजन मेहता, नवीन अग्रवाल, सविता अग्रवाल, अश्विन अग्रवाल व अदिति अग्रवाल (अमेरिका) के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

About the author

Rekha Singh

Add Comment

Click here to post a comment

Live News

Advertisments

Advertisements

Advertisments

Our Visitors

0207874
This Month : 7377
This Year : 7377

Follow Me