देश-दुनिया

सूडान-जहाँ मुसलमान ही हममजहबी का खून बहा रहे हैं

-डॉ.बचन सिंह सिकरवार
सूडान का वर्तमान भयावह गृहयुद्ध दो सैन्य के गुटों के बीच सत्ता पर नियंत्रण और भविष्य में उसकी भूमिका के मुद्दों पर जरूर हो रहा है,लेकिन अपने-अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति मे लगे दुनिया भर और विशेष इस्लामिक मुल्क/देश भी इसे बन्द कराने के बजाय दोनों गुटों को हथियार और धन देकर इस जंग को जारी रखने में लगे हैं, जिसमें पिछले ढाई साल से अधिक समय से मुसलमान ही मुसलमान का खून बहा रहा है। इससे इनके सबसे पवित्र ‘कुरान’के अमन और इस्लामिक भाईचारे का पैगाम बेमानी साबित हो रहा है। विश्व में चल रहे दूसरों युद्धों की तरह ही इस जंग को रोकने में भी ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ (यू.एन.ओ.) नाकाम/लाचार दिखायी दे रहा है। यहाँ तक कि इस्लामिक मुल्कों का सबसे बड़ा संगठन ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’( ओ.आई.सी.)भी एक तरह से तमाशबीन बना हुआ है।
सूडान में वर्तमान विवाद/जंग का मुख्य कारण दो प्रतिद्वन्द्वी सैन्य गुटों -‘सूडान सशस्त्र बल’( एस.एएफ.) और ‘रेपिड सपोर्ट बल’ (आर.ए.एफ.)के बीच सत्ता संघर्ष है,इनमें एक तरफ एस.ए.एफ. का नेतृत्व जनरल अब्देल-फतह-अल बुरहान कर रहे हैं और दूसरी तरफ आर.एस.एफ. जिसकी अगुवाई जनरल मोहम्मद हमदान‘ हेमेली’डानाले कर रहे हैं। इस संघर्ष ने गृहयुद्ध की स्थिति पैदा कर दी है,जिसके कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन, मानवीय संकट और लोगों का पड़ोसी देशों को पलायन हुआ है। इसकी
शुरुआत 15 अप्रैल, 2023 को जनरल अब्देल -अल -फतेह बुरहान के आधिकारिक आवास पर आर.एस.एफ की सैन्य टुकड़ी द्वारा किये अचानक हमले से हुई थी,इसमें उसके 35से अधिक गार्ड मारे गए,पर बुरहान किसी तरह से बच गए। इस हमले ने जनरल बुरहान के मन में आर.एस.एफ. के प्रति अविश्वास और घृणा उत्पन्न कर दी और सूडान को एक भयावह गृहयुद्ध में धकेल दिया। दूसरी ओर जनरल हेमेदती को भी पता है कि यह हमला, कई हत्याएँ तथा दुर्व्यवहार उसे एस.ए.एफ. और आम नागरिकों के लिए असहनीय स्थिति में डाल दिया है। इसके अलावा इस्लामिक कट्टरपंथी सूडान में अपनी उपस्थिति और प्रभाव को बढ़ा रहे हैं। ये युद्ध विराम और सुलह की राह में बाधक/रोढ़ा बन रहे हैं। 2019 में बशीर शासन के पतन तक इस्लामिक कट्टरपंथियों का अच्छा प्रभाव रहा। उनकी तत्कालीन राजनीतिक इकाई ‘राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी’(एन.सी.पी.)को अप्रैल, 2019 में स्थापित लोकतंत्र संक्रमण कालीन सरकार ने भंग कर दिया और उसे राजनीति में भाग लेने से भी प्रतिबन्धित कर दिया। लेकिन 15 अप्रैल, 2023के जनरल बुरहान पर आर.एस.एफ. के हमले ने इस्लामिक कट्टरपंथियों के पुनः लौटने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।उन्होंने माँग की है कि जनरल बुरहान आर.एस.एफ. के साथ सुलह या युद्धविराम के लिए सहमत न हों। वह स्वयं भी ऐसी माँग मानने को मजबूर हो गया है। वैसे सूडान में सैन्य संघर्ष का समाधान न होने देने के लिए केवल घरेलू कारक ही नहीं हैं। सूडान में अन्य देशों की भागीदारी भी बाधक है। सूडान अरब और अफ्रीका महाद्वीप के संगम तथा लाल सागर के सामने स्थित है, जो समुद्री व्यापार का एक रणनीतिक केन्द्र है। सूडान उत्तर-पूर्वी अफ्रीका में स्थित है। यह अफ्रीका के सबसे बड़े देशों में से एक है इसका क्षेत्रफल 19लाख वर्ग किलोमीटर है। यह दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है। इसके 4.6 करीब निवासी प्रति व्यक्ति औसतन 606 पाउण्ड की वार्षिक आय पर जीवन यापन करते हैं। सूडान की जनसंख्या मुख्यतः मुस्लिम हैं तथा इनकी आधिकारिक भाषाएँ- अरबी और अँग्रेजी है।इसके पश्चिम चाड तथा दक्षिण् में मध्य अफ्रीकी गणराज्य(सेण्ट्रल अफ्रीका रिपब्लिक),दक्षिण में दक्षिण सूडान,पूर्व में इथोपिया है। ज्यादातर लोग अब भीड़भाड़ वाले अस्थायी आश्रय स्थलों में रह रहे हैं,जहाँ भोजन, स्वच्छ जल और सुरक्षित आश्रय स्थल की सीमित पहुँच है। चाड ने सुरक्षा चाहने वालों का स्वागत किया है,लेकिन संसाधन कम पड़ रहे हैं,जिससे स्थानीय समुदायों पर भारी दबाव पड़ रहा है। चाड लगातार चौथे साल भी गम्भीर खाद्य संकट का सामना कर रहा है। चुनौतियों के अलावा ,भारी बारिश ने सामग्री और सहायता के परिवहन को प्रभावित किया है और प्रभावित लोगों के लिए जीवन की कठिन परिस्थितियाँ पैदा कर दी हैं। एनडी -गेन इण्डेक्ट के अनुसार चाड को दुनिया मेें सबसे अधिक जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देश माना गया है।
सूडान में सोने की खदानों के अलावा यहाँ की मिट्टी भी बहुत उपजाऊ है। यहाँ से पड़ोसी देशों को खाद्यानों और पशुधन के निर्यात किया जाता है।इसमें अब तक जान माल की बहुत अधिक हानि हुई इनके मध्य हिंसक टकराव से 2.4 करोड़ यानी 40प्रतिशत जनसंख्या एक गहरे दुःख संकट से जूझ रहा है,जो लगभग सवा करोड़ लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं इनमें 1करोड़ से अधिक आन्तरिक रूप से विस्थापित हुए है, जबकि 20लाख लोग चाड, दक्षिण सूडान, मिस्र ,इथोपिया और मध्य अफ्रीका गणराज्य सहित पड़ोसी देशों में पलायन कर गए हैं। मृतकों की संख्या का अनुमान व्यापक रूप से भिन्न है। सूडान के लिए पूर्व अमेरिकी राजदूत का अनुमान है कि 15 अपै्रल, 2023से अब तक संघर्ष शुरू होने से अब तक चार लाख मारे जा चुके हैं सूडान का संकट दुनिया के एक सबसे बड़े संकटों में एक है। अल फशर इस लड़ाई का प्रमुख केन्द्र है जिस पर नियंत्रण करने के लिए आर.एस.एफ. के लड़ाके पिछले करीब डेढ़ साल साल से इसकी घेराबन्दी किये हुए हैं।अब इस शहर पर नियंत्रण होने के बाद सामूहिक अत्याचार की भयावह जानकारी मिल रही है। 2019 में बशीर शासन के पतन से लेकर 2021 में राजनीतिक बदलाव तक लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी,जिसे कई देश ने सूडान का समर्थन प्रदान किया गया,तब वह 30 वर्षों से अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग पड़ा था। उस समय सूडान को 60बिलियन अमेरिकी डॉलर का विपुल संचित ऋण दिया जाना था, ताकि वह अपने लिए आवश्यक संसाधन जुटा सके। वर्तमान सूडान लोकतंत्रीकरण से बहुत पीछे हट गया है। दोनों सैन्य गुटों की जंग का फायदा उठाते हुए दारफुर के पूर्व में सशस्त्र समूहों ने पूर्वी सूडान में हस्तक्षेप किया है और जनजातियों पर आधारित स्थानीय सशस्त्र समूह विभिन्न स्थानों पर उभरे/सक्रिय हैं। हाल में रूस और ईरान भी सक्रिय रूप से इस जंग में सम्मिलित हुए हैं। चूँकि सूडान एक महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिति में है। इसलिए विभिन्न देशों ने सूडान के भीतर विभिन्न ताकतों के साथ सम्बन्ध बनाने की कोशिश की है। विदेशी देशों द्वारा एस.ए.एफ. और आर.एस.एफ. को वित्तीय और सैन्य हथियार दिये जाते रहे हैं। इस कारण ढाई साल से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी जंग जारी है।इस बीच हथियार और गोला-बारूद की कभी कमी नहीं पड़ी है और सैन्य झड़पें जारी हैं। यह देखते हुए तीन चिन्ताएँ उभरी हैं-इस्लामिक कट्टरपंथियों के ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात(यू.ए.ई.) जैसे मुल्कों ने ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’का दमन किया है,जबकि तुर्की,कतर,ईरान उससे हमदर्दी रखते हैं। कहा जाता है कि यूएई आर.एस.एफ. का समर्थन करता है। इसकी वजह उसके नियंत्रण में सूडान की सोने की खदान का होना है।इसके अलावा वह नहीं चाहता है कि इस्लामिक कट्टरपंथी मुस्लिम ब्रदरहुड’का प्रभाव बढ़े,जबकि एस.ए.एफ. उसे बढ़ावा दे रहा है। सूडान मेें इस्लामिक दहशतगर्दो को बढ़ता प्रभाव पड़ोसी मुल्कों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसके सिवाय सूडान से 51,000 शरणार्थियों का आना और फलस्तीनी शरणार्थी मिस्र में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
दूसरा बिन्दु- इस्लामी प्रभाव के विस्तार के साथ ‘इस्लामिक स्टेट’( आइ.एस.) समेत कई इस्लामिक कट्टरपंथी दहशतगर्द संगठनों का सूडान में प्रवेश हुआ है।इस बात की चिन्ता है कि निकट भविष्य में सूडान जिहादियों का अड्डा/केन्द्र बन सकता है।
तीसरा बिन्दु- रूस के सोने के व्यापार के माध्यम से आर.एस.एफ.से घनिष्ठ सम्बन्ध रहे हैं,किन्तु एस.ए.एफ.के पोर्ट सूडान/बन्दरगाह में स्थानान्तरण और युद्ध की स्थिति में बदलाव को मद्देनजर लाल सागर में एक अड्डा/बेस प्राप्त करने के उद्देश्य से एसएएफ के प्रति अपने दृष्टिकोण को मजबूत कर रहा है। सूडान के आन्तरिक मामलों में रूस और ईरान की सक्रिय भागीदारी युद्धविराम, शान्ति और पुनर्निर्माण प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना सकती है। सूडान की ऐसी विषम स्थिति को देखते हुए विश्वभर के देशों को अपनी निहित स्वार्थोें का कुछ समय के लिए परित्याग कर यहाँ के भीषण मानवीय संकट और नरसंहार को खत्म कराने को यथा शीघ्र प्रयास करने चाहिए।
सम्पर्क-डॉक्टर बचन सिंह सिकरवार वरिष्ठ पत्रकार, 63ब,गाँधी नगर,आगरा-2820003 मोबाइल नम्बर-9411684054

 

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