(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)
वृन्दावन। मोतीझील क्षेत्र स्थित आनन्द वृन्दावन (अखंडानंद आश्रम) में आनंद वृन्दावन चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद सरस्वती महाराज के 38वां अष्ट दिवसीय आराधन महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ।जिसके अंतर्गत आनंद वृन्दावन के अध्यक्ष स्वामी श्रवणानंद सरस्वती महाराज के द्वारा देश-विदेश से आए समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को सप्त-दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा श्रवण कराई गई।इसके अलावा सन्त बिहारीदास भक्तमाली महाराज के द्वारा पंच-दिवसीय श्रीभक्तमाल की कथा का रसास्वादन कराया गया।
इस अवसर पर आयोजित सन्त-विद्वत सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए ब्रह्मर्षि रमेश भाई ओझा ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद सरस्वती महाराज भक्ति-ज्ञान-वैराग्य के मूर्तिमान स्वरूप थे।उन जैसी पुण्यात्मायें इस पृथ्वी पर कभी-कभार ही अवतरित होती हैं।यदि हम लोग उनके किसी एक गुण को भी अपने जीवन में धारण कर लें, तो हमारा कल्याण हो सकता है।
महामंडलेश्वर कार्ष्णि स्वामी गुरुशरणानन्द महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने के लिए हमें सदगुरुदेव की शरण में जाना चाहिए।जिस प्रकार बिना नौका के नदी पार नहीं हो सकती, उसी प्रकार बिना सदगुरु के संसार रूपी भवसागर पार नहीं हो सकता है।
आनंद वृन्दावन के अध्यक्ष महंत स्वामी श्रवणानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हमारे सदगुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद सरस्वती महाराज समस्त धर्म ग्रंथों के प्रकांड विद्वान थे।उनके प्रवचन श्रवण करने के लिए समूचे देश के संत व धर्मावलंबी समय-समय पर उनके आश्रम में आया करते थे।
स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज एवं प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद सरस्वती महाराज अत्यंत सेवाभावी संत थे।उनके द्वारा स्थापित विभिन्न सेवा प्रकल्प आज भी आनंद वृन्दावन में पूर्ण समर्पण के साथ संचालित हो रहे हैं।
संत-विद्वत सम्मेलन में संत प्रवर स्वामी गोविंदानंद तीर्थ महाराज, संत महेशानंद सरस्वती महाराज, महंत बाबा संतदास महाराज, साध्वी डॉ. राकेश हरिप्रिया, आचार्य नेत्रपाल शास्त्री, आचार्य रामकुमार त्रिपाठी, स्वामी दिव्यानंद महाराज, श्रीमती संतोष कंवर, अजीत सिंह नाथावत (सीकर, राजस्थान), डॉ. राधाकांत शर्मा, आचार्य विजय द्विवेदी, आचार्य मनोज शुक्ला आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।संचालन संत सेवानंद ब्रह्मचारी ने किया।मध्याह्न में महामंडलेश्वरों, महंतों एवं धर्माचार्यों का स्वागत व सम्मान किया गया।तत्पश्चात संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारा आदि के आयोजन भी सम्पन्न हुए।






















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