डॉ.बचन सिंह सिकरवार
गत दिनों देश की राजधानी दिल्ली में भीषण बम विस्फोट के बाद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भूटान की चौथी दो दिवसीय यात्रा पर जाना, भारत के लिए अपने इस पड़ोसी लघु हिमालयी देश के साथ विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक, उसके सामरिक महत्त्व ,परस्पर विश्वास और प्रगाढ़ सम्बन्धों को दर्शाता है। यहाँ पहुँचने पर उन्होंने भारत -भूटान के मध्य सम्बन्धों को विस्तार देते हुए अब उसे ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000करोड़ रुपए का आसान शर्तों पर ऋण देने की घोषणा की है। यूँ तो भारत अपने इस पड़ोसी देश की सुरक्षा और उसके विकास के लिए हर सम्भव सहायता करता रहा है,लेकिन इस बार उसका जोर ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार पर है। इस हेतु सौर, पवन, बायोमास जैसे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गए हैं। साथ ही दोनों देशों के मध्य अत्यन्त प्राचीन तथा घनिष्ठ सांस्कृतिक सम्बन्धों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेज करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। उन्होंने घोषणा की कि भूटान के महत्त्वाकांक्षी नए शहर गेलेफू को भारत के समत्से शहर से रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से भूटान के किसानों और उद्यमियों की पहुँच को भारत के विस्तृत बाजार तक सुगम बनाया जा सकेगा। वस्तुतः गेलेफू शहर भूटान नरेश की परिकल्पना है,जो भारत की सीमा पर स्थापित किया/बसाया जा रहा है। इस शहर को लेकर पूरी दुनिया में बहुत उत्सुकता बनी हुई है। इसका कारण है कि वह यह एक ऐसा शहर बसा रहे हैं,जिसे पर्यावरण को बिना कोई क्षति पहुँचाये बसाया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी भूटान यात्रा के दौरान एक मठ में भगवान बुद्ध के उन पवित्र अवशेषों की पूजा की,जिन्हें उ.प्र.के पिपरहवा से लाया गया है। इन अवशेषों के अलावा भारत ने बौद्ध आध्यात्मिक नेता तथा भूटान के राष्ट्र संस्थापक झाबद्रुंग नामग्याल की प्रतिमा भी भेजी है,जिसे यहाँ प्रदर्शित किया गया। ऐसा कर भारत ने एक बार फिर अपने धार्मिक-सांस्कृतिक सम्बन्धों को पुष्ट करने का प्रयास किया। निश्चय ही इससे भारत को लेकर चीन की चिन्ता बढ़ी होगी,प्रधानमंत्री श्री मोदी का भी इरादा/मकसद भी ऐसा ही था।
भले ही भूटान क्षेत्रफल की दृष्टि भारत के लिए छोटा देश है, पर सामरिक नजरिये से भारत के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। सन् 1950में चीन समग्र तिब्बत और सन् 1962 में भारत के लद्दाख क्षेत्र के आक्सईचिन/अक्षयचिन को हड़पने के पश्चात अब शेष लद्दाख, भूटान,नेपाल, अरुणाचल, सिक्कम को निगलने की फिराक में है। वर्तमान में नेपाल में चीन के विस्तार को देखते हुए भारत के लिए यह सुनिश्चित करने अपरिहार्य हो गया है कि भूटान को चीन की हड़पनीति से सुरक्षित/बचाकर रखने के लिए वह हर सम्भव प्रयास करे। इसके लिए भारत सदैव प्रयत्नशील रहा है,फिर भी अन्तरराष्ट्रीय शोध संस्थान ‘सीला लाइट’ के अनुसार अभी हाल के कुछ सालों में चीन ने भूटान की पारम्परिक सीमाओं के अन्दर कम से कम 22कृत्रिम गाँव बसा लिए हैं, जो इस इस लघु देश के करीब 2प्रतिशत भू-भाग पर उसका अवैध कब्जा है। भूटान की सीमा में बसे इन चीनी गाँवों में सड़कें,सैनिक चौकियाँ और प्रशासनिक केन्द्र बना गए हैं।उसके द्वारा जमीनी स्तर पर ऐसे नए तथ्य अंकित कर दिये गए हैं,जिन्हें भूटान के लिए अस्वीकार करना दुष्कर होगा। भूटान के साथ सीमा बातचीत के तहत चीन ने नए-नए दावे भी प्रस्तुत किये हैं। चीन भूटान को निगलने की पूरी कोशिश कर रहा है। वह भूटान की स्वतंत्रता, एकता, अखण्डता, सप्रम्भुता पर लगातार प्रहार करता आ रहा है। ऐसा कर वह भारत को घेरने में लगा है। सन् 2017में चीन द्वारा डोकलाम में अवैध सड़क बनाने की कोशिश की गई,ताकि वह चिकने नेक गलियारा पर कब्जा कर भारत को अपने पूर्वोत्तर राज्यों से अलग-थलग किया जा सके। यह चीन की दीर्घकालिक योजना उदाहरण भर था।इसके लिए भारतीय सेना को 73 दिनों तक चीनी सेना से जूझना/भिड़ना पड़ा,तब कहीं वह वहाँ से लौटने को मजबूर हुई। चीन की हड़पनीति को देखते हुए भूटान के अस्तित्व को आसन्न संकट बना हुआ है,इसे देखते हुए भारत भी भूटान की सेना को सभी तरह के आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसके सैनिकों को भी प्रशिक्षित कर रहा है।
अब हम भूटान को भी जान लेते हैं ,तो भूटान हिमालय का एक पर्वतीय देश है। इसके उत्तर में चीन और दक्षिण में भारत अवस्थित है। इसका क्षेत्रफल- 46,500वर्ग किलोमीटर और इसकी राजधानी थिम्पू है,जिसका उपनाम‘ लैण्ड ऑफ थण्डरवोल्ट’ है। इसकी जनसंख्या-6,95,822से अधिक है,जो बौद्ध और हिन्दू धर्म को मानती है तथा डेंग्खा,नेपाली गुंरग,असमिया और अँग्रेजी बोलती-समझती हैं। इस देश की मुद्रा ‘न्गुलट्रम ‘है। यहाँ भारतीय रुपया भी विधि मान्य मुद्रा है। यह देश 8अगस्त,1949 को स्वतंत्र हुआ था। यहाँ पहले निरकुंश राजतंत्र था,लेकिन 2007 में किंग वांगचुक ने घोषणा की कि वे पदच्युत हो रहे हैं और उनके उत्तराधिकारी क्राउन प्रिन्स जिग्मे खेसर नामगयेले होंगे। जुलाई, 2008 में भूटान ने राजतंत्र के लगभग एक शताब्दी के बाद संविधान को अपनाया,जिसमें दो दलीय लोकतंत्र की व्यवस्था की गई। भूटान का मुख्य उद्यम कृषि है।यहाँ मुख्य रूप से चावल, मक्का, ज्वार, बाजारा तथा वन उपज गोंद, मोम,कस्तूरी आदि हैं।इस देश में इमारती लकड़ी और फलों का निर्यात किया जाता है।
सन् 2007 में संशोधित भारत-भूटान स्थायी मैत्री संधि के अनुसार दोनों देश ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियाँ का मिलकर सामना करेंगे।ऐसे में भूटान की स्वतंत्रता, सीमाओं की अखण्डता ,सुरक्षा का गुरुतर दायित्व भारत पर है। भूटान को भारत से अलग करने के लिए चीन दशकों से उसे तरह-तरह के प्रलोभनों के साथ-साथ उसे भारत के खिलाफ गुंमराह कर भड़कता आ रहा है। दक्षिण एशिया में भूटान अकेला ऐसा देश है,जिसने चीन की ‘बेल्ट एण्ड रोड’ परियोजना में सम्मिलित होने से साफ मना कर दिया है। इस बार प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत की सहायता से निर्मित पुनतसंगचु जलविद्युत परियोजना का अनावरण किया।इससे भारत को भूटान से बिजली का निर्यात और भूटान में भारतीय कम्पनियों के निवेश में वृद्धि होगी। भारत अपने उत्तर-पूर्वी राज्य असम के कोकराझार से भूटान के प्रतिष्ठित ‘न्यू गेलेफू माइण्डफुलनेस सिटी’ तक 58 किलोमीटर लम्बी रेल लाइन का भी निर्माण कर रहा है। इससे परस्पर व्यापार और पर्यटन का विकास होगा। अन्तरिक्ष उपग्रहों से लेकर वित्तीय प्रौद्योगिकी तक भारत उभरते क्षेत्रों में भूटान की सहायता कर रहा है,ताकि उसके विभिन्न राजनीतिक समूह तथा सामाजिक वर्ग भारत के साथ मित्रता के ठोस लाभ अनुभव कर सकें। सालों से भूटान भारतीय सहायता का सबसे बड़ा प्राप्तकर्त्ता रहा है। 2025-2026 के भारतीय बजट में उसके लिए 2,150 करोड़ रुपए आवण्टित किये गए हैं।
फिर भी चीन अपनी भेद नीति से उसे किसी भी तरह से भारत से दूर कर अपने इन्द्र जाल में फँसाने को गिद्ध दृष्टि गढ़ाये हुए है। इस गम्भीर खतरे को समझते हुए भारत चीन को ऐसा कोई अवसर/मौका देना नहीं चाहता,जिससे वह नेपाल, श्रीलंका,बांग्लादेश, मालदीव, पाकिस्तान की तरह उसके यहाँ पाँव पसार सके और उसें भारत के विरुद्ध इस्तेमाल कर सके। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इस भूटान यात्रा से यह दर्शाने का भरपूर प्रयास किया कि भारत चीन से प्रतिस्पर्द्धा करने में किसी माने में पीछे नहीं है। वैसे चीन भूटान को कितना भी भरमाये,वहाँ के लोग भी चीन के असल इरादों से नावाकिफ/अनजान नहीं हैं।
सम्पर्क-डॉक्टर बचन सिंह सिकरवार वरिष्ठ पत्रकार, 63ब,गाँधी नगर,आगरा-2820003 मोबाइल नम्बर-9411684054
भारत के लिए बहुत माने रखता है भूटान






















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