कार्यक्रम

वात्सल्य ग्राम में आयोजित हुआ द्वि-दिवसीय निःशुल्क नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर

 

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।मथुरा रोड़ स्थित वात्सल्य ग्राम के प्रेमवती गुप्ता नेत्र चिकित्सालय में गंधार फाउण्डेशन एवं कमलावेन बाबू लाल चैरिटेवल ट्रस्ट, मुम्बई के संस्थापक रमेश भाई पारिक के द्वारा द्वि-दिवसीय निःशुल्क नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया।जिसके अंतर्गत सैकड़ों नेत्र रोगियों को निःशुल्क औषधि एवं चश्मा वितरण किया गया।
शिविर का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि आचार्य मृदुल कान्त शास्त्री ने यजुर्वेद का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि सौ वर्ष का जीवन भी बिना नेत्र ज्योति बेकार है। बिना नेत्र ज्योति के बलिष्ट व्यक्ति भी दूसरों पर आश्रित हो जाता है।हम जितना भी जीवन जिए संसार की शुभता का दर्शन करते हुए जिएं, तभी हमारा जीवन जीना सार्थक है। नेत्र दान से बड़ा कोई दान नहीं होता।
मुख्य अतिथि भुवन भूषण कमल ने कहा कि ईश्वर ने केवल दो लोगो को अपनी विशेष कृपा प्रदान डाक्टर एवं न्यायाधीश दो को ही ईश्वर का दर्जा दिया गया है।वात्सल्य ग्राम खड़े करने में दीदी माँ जी का त्याग, तपस्या, तपस्या – सर्मण का ही प्रतिफल है।
डॉ. श्याम अग्रवाल ने फरवरी 2026 तक प्रत्येक माह लगने वाले शिविर की जानकारी देते हुए कहा कि श्रद्धेय दीदी माँ की कृपा एवं आशीर्वाद के बिना कैम्प कराना सम्भव ही नहीं है।
डाँ. आरती अग्रवाल ने रोगियों को आँख के साथ सावधानियां बताते हुए कहा कि ऑपरेशन वालों को अपनी आँख की देखभाल हाल के पैदा हुए बच्चे के समान करना चाहिए आँख जीवन का अमूल्य रत्न है इसे संभाल कर रखना आपकी जिम्मदारी है।
शिविर में आगरा, इटावा, फरुरवावाद,मैनपुरी, पीलीभीत , बदायूं, भरतपुर, दिल्ली, कासगंज, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा-वृन्दावन आदि स्थानों से 308 रोगियों के मोतियाबिन्द का निःशुल्क आपरेशन मुम्बई के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल एवं डॉ. विशाल राठौर, डाँ राहुल जैन, डॉ मयूर अग्रवाल, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. अनुज वाहुआ, डॉ. जुगल शाह, डॉ. श्वेता डॉ. आदि ने सफल आपरेशन किये।
इस अवसर पर साध्वी साक्षी चेतना, संजय भैया, साध्वी शिरोमणि, साध्वी सत्य श्रद्धा, सध्वी सत्यव्रता, साध्वी सत्य श्रुति, स्वामी आलोकानन्द, श्रीमती ब्रज लता गोयल, शिविर की संयोजिका मीनाक्षी अग्रवाल, रमाकान्त शर्मा, महेन्द्र सिंह आदि की उपस्थिति विशेष रही।साध्वी शिरोमणि ने आभार व्यक्त किया तथा संचालन डॉ. उमाशंकर राही ने किया।

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