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संकट मोचन सेना (महिला प्रकोष्ठ), पंजाब के द्वारा धूमधाम से सम्पन्न हुआ तुलसी शालिग्राम विवाह महोत्सव

 

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।मोतीझील क्षेत्र स्थित देवरहा बाबा आश्रम में संकट मोचन सेना (महिला प्रकोष्ठ), पंजाब प्रान्त की यशस्वी अध्यक्ष व प्रख्यात समाजसेवी श्रीमती मनप्रीत कौर (लुधियाना) के द्वारा देवोत्थान एकादशी के अवसर पर तुलसी शालिग्राम विवाह महोत्सव अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।जिसके अंतर्गत तुलसी माता का अत्यन्त नयनाभिराम श्रृंगार किया गया।साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन किया गया।
इस अवसर पर आयोजित सन्तविद्वत सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए आचार्य/भागवत पीठाधीश्वर मारुति नंदनाचार्य वागीश महाराज ने कहा कि कार्तिक मास भगवान विष्णु का अत्यन्त प्रिय मास है।हमारे धर्मग्रंथों के द्वारा कार्तिक मास की सर्वाधिक महिमा कही गई है। इसीलिए इस मास में विश्वभर से असंख्य भक्त-श्रद्धालुओं ब्रज धाम में आकर पुण्य अर्जित करते हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. आदित्यानंद गिरि महाराज ने कहा कि कार्तिक मास अत्यंत महिमामयी मास है।क्योंकि कार्तिक मास के अधिदेव राधाकृष्ण हैं।इसीलिए इसे दामोदर मास भी कहा गया है।इस मास में किए गए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान शत गुणा फल प्रदान करने वाले होते हैं। “स्कन्द पुराण” एवं “श्रीभक्ति विलास” आदि ग्रंथों में इस मास की महिमा का विस्तार से वर्णन है।
प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी-शालिग्राम का विवाह कराने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।साथ ही भगवान विष्णु शीघ्र ही प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।
“धर्म रत्न” स्वामी बलरामाचार्य महाराज ने कहा कि कार्तिक मास अत्यंत उत्सवधर्मी मास है।इस माह में शरद पूर्णिमा, करवाचौथ, अहोई अष्टमी, रमा एकादशी, गौवत्स द्वादशी, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गिरिराज गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया, भैया दौज, गोपाष्टमी, अक्षय नवमी, देवोत्थान एकादशी एवं तुलसी शालिग्राम विवाह महोत्सव आदि जैसे अनेक मांगलिक उत्सव हैं। जो कि भारतीय वैदिक संस्कृति के प्राण हैं। इन पर्वों व त्योहारों से भारतीय वैदिक संस्कृति निरन्तर पल्लवित व पोषित होती है।
सन्त विद्वत सम्मेलन में श्रीराधा उपासना कुंज के महन्त बाबा संतदास महाराज, ब्रज अकादमी की सचिव साध्वी डॉ. राकेश हरिप्रिया, पण्डित रामनिवास शर्मा (गुरुजी), डॉ. राधाकांत शर्मा, युवराज श्रीधराचार्य महाराज, पार्षद सुमित गौतम, पण्डित जयगोपाल शास्त्री, आचार्य ईश्वरचन्द्र रावत आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इससे पूर्व सरस भजन संध्या सम्पन्न हुई।जिसमें विश्वविख्यात भजन गायक पण्डित बनवारी महाराज ने ठाकुरजी के विवाह से संबंधित रचनाएं बधाईयों का गायन किया।
महोत्सव की संयोजक श्रीमती मनप्रीत कौर (लुधियाना) एवं आचार्य अंशुल पाराशर ने समस्त सन्तों-विद्वानों व धर्माचार्यों का पटुका ओढ़ाकर व प्रसादी भेंट कर स्वागत किया।महोत्सव का समापन सन्त, ब्रजवासी वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारे के साथ हुआ।जिसमें सैकड़ों व्यक्तियों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

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