बादल सरकार जन्म शताब्दी वर्ष में इप्टा आगरा और प्रलेस आगरा ने “बादल सरकार की विरासत “विषयक संगोष्ठी का आयोजन नागरी प्रचारिणी सभा आगरा में किया गया।बादल सरकार के बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व की खूबियों को संगोष्ठी में विद्वान वक्ताओं ने प्रभावी ढंग से व्यक्त किया । बादल सरकार की तीसरे थियेटर की संकल्पना के पीछे यही ध्येय था कि थियेटर मानवता का पोषक बने और आम जन को अपने कर्तव्यों और अधिकारों के प्रति जागरूक करे ।अनेक नाटकों के रचयिता बादल सरकार आज भी लोकप्रिय हैं ।बंगला भाषा के अलावा अनेक भाषाओं में उनके नाटकों के अनुवाद हुए और उनका कुशलतापूर्वक मंचन हुआ ।आगरा में अनेक संस्थाओं ने बड़ी बुआ जी,भोमा और जुलूस के मंचन आज भी याद किए जाते हैं ।भारत की सांस्कृतिक विरासत के उन्नायक बादल सरकार पर समानान्तर इलाहाबाद ने महत्त्वपूर्ण विशेषांक प्रकाशित किया है ।जिसके संपादक श्री अनिल रंजन भौमिक हैं ।इसका लोकार्पण श्री राजेन्द्र कुमार और विद्वत जन ने किया ।राजेन्द्र कुमार जी ने कहा कि आज जब इतने तरह के संकट हैं तब बादल सरकार पर पत्रिका निकाल कर अनिल रंजन भौमिक ने महत्वपूर्ण काम किया है ।हिंदी अपनी भाषा को तभी समृद्ध कर सकती है जब अन्य भारतीय भाषाओं के समृद्ध रचनाकारों को,महत्वपूर्ण नाटककारों की विरासत को न केवल याद करे वरन उसके श्रेष्ठ तम को आगे बढ़ाए।अध्यक्षता डॉ कमलेश नागर ने की ।आपने इप्टा से अपने जुड़ाव की चर्चा करते हुए कहा कि बादल सरकार पर की गई संगोष्ठी के आयोजन को सराहा । शुरू में रविंद्र संगीत देवाशीष गांगुली ने प्रस्तुत किया।आगरा इप्टा के कलाकारों ने सामयिक गीत प्रस्तुत किए ।भारतीय जन नाट्य संघ(इप्टा),आगरा के संगीत निर्देशक परमानंद शर्मा और साथियों _ भगवान स्वरूप,असलम खान ने नाट्य पितामह राजेंद्र रघुवंशी का गीत_बाधक हो तूफान बवंडर,नाटक नहीं रुकेगा तथा गीतकार गोपाल दास नीरज का गीत _इसीलिए तो नगर नगर बदनाम हो गए मेरे आसूं प्रस्तुत किए। दोनों अतिथि वक्ताओ का परिचय मुक्ति किंकर ने पढ़ा। बादल सरकार की कविता “लक्ष्मीविहीन” जय कुमार ने पेश की। संचालन दिलीप रघुवंशी ने किया और धन्यवाद ज्ञापित किया प्रोफेसर ज्योत्स्ना रघुवंशी ने ।इस अवसर रमेश अजीत कुमार बनर्जी,प्रवीर पंडित,नीरज मिश्रा, डा मीना यादव,कुसुम चतुर्वेदी,पूरन सिंह ,कुमकुम रघुवंशी,भावना रघुवंशी ,प्रवीर गंगोली, तारा चंद,धर्मजीत,सावित्री सिंह आदि मौजूद रहे ।
बादल सरकार का रंगमंच दर्शकों को सोचने की देता है प्रेरणा
1 month ago
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Rekha Singh
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