कार्यक्रम

वैदिक सनातन संस्कृति के परम् उपासक थे सन्त प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज : भागवताचार्य गोपाल भैया महाराज

डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।वंशीवट क्षेत्र स्थित संकीर्तन भवन में श्रीसंकीर्तन भवन धार्मिक न्यास ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहा ब्रह्मलीन संत प्रवर प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज का 136वां प्रादुर्भाव महोत्सव अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।जिसके अंतर्गत सप्त दिवसीय श्रीभागवत चरित पारायण, फूल बंगला दर्शन, बधाई गायन, संतप्रवर प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक एवं सन्त, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा (वृहद भंडारा) आदि कार्यक्रम भी संपन्न हुए।
इस अवसर पर आयोजित संत-विद्वत सम्मेलन में धीर समीर आश्रम के अध्यक्ष श्रीमहंत मदन मोहन दास महाराज ने कहा कि गोलोकवासी संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज संत समाज के गौरव थे।वे ऐसे महापुरुष थे,जो भगवद आज्ञानुसार इस धरा पर मानव कल्याण के लिए अवतरित होते हैं और उन्ही के इच्छा से यहां से चले जाते हैं।ऐसे दिव्य संतों का दर्शन सदैव ही मंगलकारी होता है।
पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री एवं भागवताचार्य डॉ. अशोक शास्त्री ने कहा कि संत प्रवर प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज की गौ भक्ति, विप्र भक्ति व संत भक्ति प्रणम्य है।वे भगवद स्वरूप थे।वह धर्म व अध्यात्म जगत की बहुमूल्य निधि हैं।
भागवताचार्य गोपाल भैया महाराज व श्रीसंकीर्तन भवन धार्मिक न्यास ट्रस्ट के ट्रस्टी आचार्य विनय त्रिपाठी ने कहा कि हमारे सदगुरुदेव वैदिक सनातन संस्कृति के परम् उपासक, राष्ट्र हित चिन्तक व गौभक्त संत थे। उन्होंने धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के साथ रहकर गौहत्या आन्दोलन का नेतृव किया था।
“यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं श्रीराम कथा मर्मज्ञ अशोक व्यास रामायणी ने कहा कि संत शिरोमणि प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज अत्यंत तपस्वी व सिद्ध संत थे।उन्होंने अपने तप व साधना की शक्ति से असंख्य व्यक्तियों का कल्याण कर उन्हें प्रभु भक्ति के मार्ग से जोड़ा।ऐसे संत कभी-कभार ही पृथ्वी पर अवतार लेते हैं।
इस अवसर पर प्रख्यात भागवताचार्य अनुराग कृष्ण शास्त्री (कन्हैया जी), मुकेश मोहन शास्त्री, पण्डित सुरेश चन्द्र शास्त्री, श्याम सुन्दर ब्रजवासी, आचार्य अंशुल पाराशर, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, प्रवीण त्रिपाठी, आदि के भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।

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Rekha Singh

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