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समस्त सनातन धर्मावलंबियों को नित्य करना चाहिए श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ : गुरुशरणानंद महाराज

 

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीकृष्ण कृपा धाम में इन दिनों शरद पूर्णिमा के अपलक्ष्य में त्रिदिवसीय शरदोत्सव
अत्यंत धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ चल रहा है।जिसके अंतर्गत विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों आयोजित हो रहे हैं।महोत्सव के दूसरे दिन ठाकुर श्रीकृष्ण कृपा बिहारी महाराज का भव्य श्रृंगार किया गया।साथ ही उनको 56 भोग लगाए गए।
तत्पश्चात आयोजित वृहद संत सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए महामंडलेश्वर कार्ष्णि स्वामी गुरुशरणानंद महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से कुरुक्षेत्र की भूमि पर कही गई श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा ग्रंथ है,जो जीवन की समस्त चुनौतियों से निपटने, नैतिक दुविधाओं को समझने और दैनिक कार्यों में अर्थ खोजने के लिए व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती है।इसी लिए समस्त सनातन धर्मावलंबियों को नित्य इस ग्रंथ का पाठ करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि शरद पूर्णिमा पर श्रीधाम वृन्दावन के वंशीवट पर हुआ महारास धर्म व अध्यात्म जगत का एक प्रमुख आख्यान है। वस्तुत: परमात्मा व जीवात्मा का मधुर मिलन ही महारास का सही अर्थ है। क्योंकि यह गोपियों द्वारा अपने मोक्ष की कामना से किया गया था।
महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा शीत ऋतु का उद्घोषक पर्व है।इस तिथि को चंद्रमा से आने वाली अमृतमयी किरणें समूची प्रकृति को आलोकित करती हैं।इससे न केवल प्रकृति अपितु हम सभी का मन भी प्रफुल्लित व पुलकित हो जाता है।
श्रीनाभापीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा की दिव्य रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा असंख्य ब्रज गोपीकाओं के साथ की गई महारास लीला अद्भुत व अनोखी है।साथ ही यह श्रीकृष्ण के द्वारा कामदेव को पराजित करने वाली लीला है।
संत सम्मेलन में भागवत भास्कर कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुरजी महाराज, श्रीहित अंबरीश महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी चित्तप्रकाशानंद महाराज, बाबा भूपेन्द्र सिंह (पटियाला,पंजाब), अखंडानंद आश्रम (आनन्द वृन्दावन) के महंत स्वामी श्रवणानंद सरस्वती महाराज, प्रख्यात सन्त स्वामी गिरीशानन्द सरस्वती महाराज, पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, भागवताचार्य संजीव कृष्ण शास्त्री, “यूपी रत्न” की उपाधि से अलंकृत प्रख्यात साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, आचार्य/भागवत पीठाधीश्वर मारुति नंदनाचार्य वागीश महाराज, आचार्य नेत्रपाल शास्त्री, युवराज श्रीधराचार्य महाराज, भागवताचार्य श्रीराम मुदगल आदि ने भी विचार व्यक्त किए।संचालन सुरेश गोयल ने किया।
महोत्सव में उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह सचिव मणि प्रसाद शर्मा, श्रीकृष्ण जन्म भूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह, एडवोकेट, वासुदेव शरण, शक्ति स्वरूप ब्रह्मचारी, डॉ. अनूप शर्मा, भजन गायक रतन रसिक, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, गोविन्द ब्रह्मचारी, भागवताचार्य केशवदेव महाराज, देवेंद्र शर्मा, संजय शर्मा, अशोक चावला आदि के अलावा विभिन्न प्रांतों से आए असंख्य भक्त श्रद्धालु उपस्थित थे।
रात्रि को सुप्रसिद्ध भजन गायक बाबा चित्र-विचित्र महाराज द्वारा सरस भजन संध्या का आयोजन सम्पन्न हुआ।जिसमें उन्होंने श्रीराधाकृष्ण की महिमा से ओतप्रोत भजन गाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया।

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Rekha Singh

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