देश भर के 15 राज्यों के 55 प्रतिष्ठित चित्रकार कर रहे हैं अपनी कला का प्रदर्शन
(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)
वृन्दवन।छटीकरा रोड़ स्थित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आश्रम में तीन दिवसीय पेंटिंग कार्यशाला के आयोजन की विधिवत शुरूआत हो हुई। रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में 21 सितंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन पूज्य संत श्री गोविंदानंद तीर्थ तथा पद्मश्री श्रीकृष्ण कन्हाई चित्रकार के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस दौरान काउंसिल के ट्रस्टी देव दत्त शर्मा (पूर्व आईएएस) ने माल्यार्पण कर अतिथियों का सम्मान किया।
इस अवसर पर पूज्य गोविंदानंद तीर्थ ने चित्रकारों को ईश्वर द्वारा बनाई गई श्रृष्टि की चित्रकारी एवं भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्राकट्य-स्थल ब्रज की सांस्कृतिक महिमा को बताते हुए आह्वान किया कि आपकी तूलिका गिरिराज महाराज, यमुना महारानी, पशु-पक्षी तथा भगवान की लीलाओं का ऐसा चित्रण हो ताकि हर चित्र एक संदेश दे। पद्मश्री श्रीकृष्ण कन्हाई ने कहा कि भगवान कृष्ण की चित्रकारी एक साधना के रूप में यदि की जाए तो निस्संदेह वह चित्र अपने आप भाव प्रकट करते हैं।
इस चित्रकला पेंटिंग कार्यशाला का थीम ब्रज और उसकी संस्कृति है।
काउंसिल के विशेष सचिव विवेक शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम में पूरे देश के 15 राज्यों के 55 प्रतिष्ठित चित्रकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।इस प्रतियोगिता में जो पेंटिंग प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर होंगी, जजेस के द्वारा उन कलाकारों का सम्मान किया जाएगा।
आज इस कार्यक्रम में भागवत प्रवक्ता आचार्य शिवाकांत महाराज, काशी से सतुआ बाबा, कानपुर से करौली सरकार तथा केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल भी पधारे, जिन्होंने प्रतिभागी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रख्यात चित्रकार द्वारिका आनंद एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी व पूर्व आई.ए.एस. देवदत्त शर्मा का, उनके द्वारा धर्म,अध्यात्म व भारतीय संस्कृति के संवर्धन व उन्नयन हेतु किए जा रहे कार्यों के लिए “सप्त निधि दर्शन” नामक चित्र को भेंट करके सम्मान किया।साथ ही ठाकुर बांके बिहारी महाराज से उनके स्वस्थ, उज्ज्वल व सुदीर्घ जीवन की मंगल कामना की।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल महेश्वरी, क्यूरेटर पवन टाक, सौरभ गौड़, मंगलायतन विश्वविद्यालय के चित्रकला विभाग की प्रोफेसर व प्रख्यात कवियित्री डॉ. प्रेमलता, डॉ. राधाकांत शर्मा एवं उर्मा शर्मा भी शामिल हुईं।
ट्रस्टी देवदत्त शर्मा ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल देश की एक ऐसी संस्था है, जो अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला के मंदिर संघर्ष पर भी कार्य करती है और मां सीताजी के प्राकट्य-क्षेत्र सीतामढ़ी में भी मां सीताजी को श्रीभगवती के रूप में स्थापित करने के प्रति संकल्पित है। काउंसिल श्रीरामजन्म भूमि के 500 वर्षों के इतिहास पर 1250 पृष्ठों का एक ग्रंथ ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’ को भी तैयार कर चुकी है,जिसका शीघ्र ही विमोचन होना है।साथ ही माता सीता के प्रति सीतामढ़ी में काउंसिल के सतत कार्यों को देखते हुए बिहार सरकार ने काउंसिल को 12 एकड़ जमीन भी आवंटित की है। काउंसिल में हाल में संपन्न हुए महाकुंभ पर एक बड़ा साहित्य ‘महाकुंभ का महामंथन” भी तैयार किया है।





















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