(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)
वृन्दावन।यमुना पार स्थित देवरहा बाबा समाधि स्थल पर इण्टरनेशनल देवरहा दिव्य फाउंडेशन के द्वारा ब्रह्मर्षि योग सम्राट देवरहा बाबा का त्रिदिवसीय 35वां योगिनी एकादशी वार्षिक पुण्यतिथि महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ चल रहा है।महोत्सव के दूसरे दिन विश्वभर से आए असंख्य भक्तों-श्रृद्धालुओं के द्वारा गर्भ गृह व महा समाधि का अभिषेक व पूजन अर्चन किया गया।साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य विश्व शांति हेतु यज्ञ किया गया। इसके अलावा रात्रि जागरण करते हुए दूर-दराज से आए हजारों भक्तों-श्रृद्धालुओं ने संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य अखंड हरिनाम संकीर्तन किया।
इस अवसर पर समस्त भक्तों-श्रृद्धालुओं को अपने आशीर्वचन देते हुए आश्रम के अध्यक्ष ब्रह्मर्षि देवदास महाराज (बड़े सरकार) ने कहा कि ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा सरकार ऋषि परंपरा के अद्वितीय संत थे।उन्हें अष्टांग योग की सिद्धि और ब्रह्मलीन अवस्था में रहने की सिद्धियां प्राप्त थी।वे हमेशा सत्य, धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उपदेश देते थे।उन्होंने अपना सारा जीवन गंगा, यमुना,नर्मदा व सरयू आदि नदियों के किनारे लकड़ी के बने ऊंचे मचान पर रहते हुए व्यतीत किया।वे त्रिकाल दर्शी और सिद्ध योगी थे।उन्होंने कभी भी जाति, वर्ण, संप्रदाय आदि के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किया।
उन्होंने कहा कि पूज्य बाबा महाराज कहा करते थे कि जैसे दो लकड़ी की रगड़ से अग्नि उत्पन्न होती है, वैसे ही एक लकड़ी हृदय है और दूसरी लड़की राम नाम।जब हृदय की लकड़ी पर राम नाम रूपी लकड़ी की बारम्बार रगड़ होगी, तो निश्चित ही भगवान राम का साक्षात्कार हो जाएगा।
योगीराज देवदास महाराज (बड़े सरकार) ने कहा कि यदि थोड़े बहुत साधन से ईश्वर की अनुभूति न हो, तो हमको निराश नहीं होना चाहिए।जैसे एक गोताखोर यदि एक बार में सागर से मोती प्राप्त नहीं कर पाता है, तो वो निरन्तर गोते लगाकर अपने उद्देश्य में सफल हो जाता है।वैसे ही साधक को भी ईश्वर प्राप्ति के लिए निरन्तर साधना करते रहना चाहिए।
महोत्सव में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ ब्रज विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्रा, प्रख्यात भजन गायक नंदू भैया, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, महंत रामकेवल दास महाराज, महन्त शिवदत्त प्रपन्नाचार्य महाराज, डॉ. राधाकांत शर्मा आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। महोत्सव के अंतर्गत संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारा हुआ।























This Month : 12817
This Year : 118857
Add Comment