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भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति का उद्घोषक पर्व है अक्षय तृतीया : भक्ति वेदांत मधुसूदन गोस्वामी महाराज

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।सेवाकुंज गली स्थित श्रीकृष्ण बलराम मन्दिर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व मन्दिर के अध्यक्ष भक्ति वेदांत मधुसूदन गोस्वामी महाराज (विश्व बन्धु) के पावन सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ मनाया गया।जिसके अंतर्गत श्रीकृष्ण प्रिया दासी ने मंदिर में विराजित ठाकुरश्री राधा ललित माधव महाराज का चंदन से अत्यंत नयनाभिराम व चित्ताकर्षक श्रृंगार किया गया।साथ ही उन्हें अनेकों प्रकार के फल, मिष्ठान एवं शीतल पेय पदार्थों का भोग लगाया गया।साथ ही उनकी भव्य महाआरती की गई।
मन्दिर के अध्यक्ष भक्ति वेदांत मधुसूदन गोस्वामी महाराज (विश्व बन्धु) ने कहा कि अक्षय तृतीया का महापर्व भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति का उद्घोषक पर्व है।पृथ्वी पर मां गंगा का अवतरण, भगवान परशुराम प्राकट्य, मां अन्नपूर्णा का प्रादुर्भाव, सतयुग और त्रेता आदि युगों का प्रारंभ आदि महत्वपूर्ण कार्य इसी तिथि को हुए हैं।इसके अलावा चार धामों में से एक भगवान बद्रीनाथ के कपाट भी दर्शनों के लिए इसी तिथि को खोले जाते हैं।इसीलिए अक्षय तृतीया को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है।
ब्रज साहित्य सेवा मंडल के अध्यक्ष डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि चंदन यात्रा महोत्सव का शुभारंभ कई दशकों पूर्व जगन्नाथपुरी (उड़ीसा) के प्रख्यात संत माधवेन्द्र पुरी महाराज के द्वारा अक्षय तृतीया के अवसर पर हुआ था।इसीलिए इस दिन ठाकुरजी का चंदन महोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है।
दिव्य शक्ति अखाड़ा के ब्रज मंडल अध्यक्ष पण्डित बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि श्रीधाम वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालयों में चंदन श्रृंगार का अत्यधिक महत्व है।क्योंकि चंदन ठाकुर विग्रहों को ग्रीष्म में शीतलता प्रदान करता है।
इससे पूर्व संतों व भक्तों के द्वारा चंदन श्रृंगार से सम्बन्धित पदों का संगीतमय सामूहिक गायन किया गया।
महोत्सव में भक्ति वेदांत साधु महाराज, भक्तिवेदांत दामोदर महाराज, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, ब्रजराज दास (फरीदाबाद), प्रेमप्रदीप दास, रविकुमार शर्मा, अच्युतानंद दास, मधुकर दास, गिरधारी दास, अनिरुद्ध दास आदि के अलावा देश-विदेश के असंख्य भक्त-श्रद्धालु उपस्थित रहे।महोत्सव के अंतर्गत संत, बृजवासी, वैष्णव सेवा और वृहद भंडारा भी हुआ।जिसमें सैकडो लोगों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

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Rekha Singh

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