लेख साहित्य

कुंडली

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गौरी शंकर सिंह

हुआ”तमाशा”पूर्ण,चूर्ण और जीर्ण हुईं प्रत्याशा.
जस के तस हालात,लोक में शंसय और निराशा.
शंसय और निराशा का दुर्योग छद्म छल कारी .
जनता के सापेक्ष सुरक्षित नेता और अधिकारी.
जन गण मन निरपेक्ष अरक्षित मूढ़तंत्र की भाषा.
सद आसय से पूर्ण अतार्किक असफल हुआ तमाशा.

गौरी शंकर सिंह

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