कार्यक्रम

रासमण्डल पर श्रीराधावल्लभीय संप्रदाय के तीन ग्रंथों “श्रीयमुनाष्टक”, “श्रीहित धर्म का सनातन स्वरूप” व “श्रीराधावल्लभ प्रेम-रूप दर्शन” का हुआ लोकार्पण

 

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।गोविन्द घाट स्थित अखिल भारतीय निर्मोही बड़ा अखाड़ा श्रीहित रासमण्डल पर रसावतार श्रीहित हरिवंश महाप्रभु सांस्कृतिक संस्थान (रजि.) के तत्वावधान में श्रीवंशी स्वरूप रसावतार श्रीहित हरिवंश महाप्रभु के 551वें प्राकट्य महोत्सव एवं संस्थान के 46वें वार्षिक महोत्सव के अंतर्गत तीन वाणी ग्रंथों का हितार्पण (लोकार्पण) अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।
लोकार्पण समारोह में गोस्वामी वृंदावन वल्लभ महाराज द्वारा व्याख्यायित पुस्तक “श्रीयमुनाष्टक”, गोस्वामी वंशी वल्लभ महाराज द्वारा व्याख्यायित पुस्तक “श्रीहित धर्म का सनातन स्वरूप”, एवं गोस्वामी योगेंद्र वल्लभ महाराज “युगल” द्वारा व्याख्यायित पुस्तक “श्रीराधावल्लभ प्रेम-रूप दर्शन” का हितार्पण (लोकार्पण) प्रख्यात संत मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरू द्वाराचार्य स्वामी डॉ. राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज, रासमंडल के श्रीमहंत लाड़िली शरण महाराज, संत लालन प्रेमधन महाराज (संतश्री), महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री, श्रीसिंहपौर हनुमान मंदिर के महंत सुंदरदास महाराज, संत रसिक माधव दास महाराज, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं महंत दंपति शरण महाराज (काकाजी) आदि ने संयुक्त रूप से किया।
मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरू द्वाराचार्य स्वामी डॉ. राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीराधावल्लभ संप्रदाय विशुद्ध प्रेमोपासना पर आधारित है।जिसका मूल तत्व “श्रीहित” है।जिसमें कि प्रेम व सौहार्द्र समाविष्ट है।यदि हम सभी इस तत्व को आत्मसात करके अपने जीवन में धारण कर लें, तो निश्चित ही हमारे देश व समाज का कल्याण हो सकता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आज लोकार्पित हुई तीनों पुस्तकें हिन्दी वांग्यमय की बहुमूल्य निधि सिद्ध होंगी।
इस अवसर पर ठाकुर श्रीराधावल्लभ मन्दिर के अंगसेवी व सेवाधिकारी आचार्य श्रीहित योगेन्द्र वल्लभ गोस्वामी महाराज, आचार्य श्रीहित यतीन्द्र वल्लभ गोस्वामी महाराज, आचार्य श्रीहित सुकृत लाल गोस्वामी महाराज, आचार्य श्रीहित गोविंद लाल गोस्वामी महाराज, संत रसिया बाबा, डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, आचार्य विजय किशोर मिश्र, आचार्य विष्णु मोहन नागार्च, भागवताचार्य गोपाल भैया, आचार्य ललित वल्लभ नागार्च, रासाचार्य स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा, डॉ. राधाकांत शर्मा, राधेश्याम अग्रवाल, श्रीमती निर्मला अग्रवाल, दीपक सर्राफ, श्रीमती कीर्ति सर्राफ, विनोद अग्रवाल आदि की उपस्थिति विशेष रही।संचालन परम् हितधर्मी डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा ने किया।अतिथियों का सम्मान व धन्यवाद ज्ञापन आचार्य योगेंद्र वल्लभ गोस्वामी “युगल” के द्वारा किया गया।

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Rekha Singh

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