कार्यक्रम

ज्ञान, भक्ति व बल के सिंधु है श्रीहनुमानजी महाराज : स्वामी श्रवणानंद सरस्वती महाराज

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।मोतीझील स्थित श्रीराधा उपासना कुंज में ब्रज के प्रख्यात संत श्रीपाद बाबा महाराज के द्वारा संस्थापित ब्रज अकादमी का 45 वां त्रिदिवसीय स्थापना दिवस व श्रीहनुमान जयंती महोत्सव अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ।जिसके अंतर्गत श्रीभक्तमाल अर्चा, अखंड रामचरितमानस, संगीतमय सामूहिक सुंदरकांड पाठ, दिव्य रासलीला एवं संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा (भंडारा) आदि के कार्यक्रम भी सम्पन्न हुए।
महोत्सव का शुभारंभ आनंद वृन्दावन (अखंडानंद आश्रम) के परमाध्यक्ष स्वामी श्रवणानंद सरस्वती महाराज एवं अनेक प्रमुख संतों व विद्वानों ने श्रीराधा कृष्ण एवं स्वामी श्रीपाद बाबा महाराज के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। तत्पश्चात् सम्पन्न हुए संत-विद्वत सम्मेलन में अखंडानंद आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी श्रवणानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि श्रीहनुमानजी महाराज ज्ञान, भक्ति व बल के सिंधु है।सनातन धर्म में केवल वे ही ऐसे देव हैं, जिनका जन्म महोत्सव वर्ष में दो बार मनाया जाता है।उनका स्मरण ही जीव के समस्त कष्टों का नाश कर देता है।
श्रीराधा उपासना कुंज के श्रीमहंत बाबा संतदास महाराज व ब्रज अकादमी की सचिव साध्वी डॉ. राकेश हरिप्रिया ने कहा कि ब्रह्मलीन श्रीपाद बाबा महाराज श्रीधाम वृन्दावन के परम रससिद्ध, अध्यात्म योगी व परम वीतरागी संत थे।उन्होंने ब्रज की प्राचीन संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए आज से 44 वर्ष पूर्व श्रीधाम वृन्दावन के जयपुर मन्दिर में छोटी दीपावली के दिन ब्रज अकादमी की स्थापना की थी।जिसके लिए वे अपने जीवन के अंतिम समय तक पूर्ण समर्पित रहे।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी व प्रमुख समाजसेवी पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि संत प्रवर श्रीपाद बाबा महाराज परम् तपस्वी व विलक्षण संत थे।ब्रज संस्कृति व श्रीधाम वृन्दावन के प्राचीन स्वरूप को पुनः उजागर करने में पूज्य बाबा महाराज का जो अतुलनीय योगदान रहा है,उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है।
श्रीराम कथा मर्मज्ञ स्वामी भानुदेवाचार्य महाराज एवं आचार्या नेत्रपाल शास्त्री ने कहा कि श्रीहनुमानजी महाराज कलयुग के सच्चे देव हैं।मां जानकी के आशीर्वाद से वे सप्त चिरंजीवियों में सबसे प्रमुख हैं।वे बल,बुद्धि और विवेक के निधान हैं।संसार में ऐसा कोई कार्य नहीं, जिसे हनुमानजी महाराज पूर्ण नही कर सकते हैं।
इस अवसर पर महंत हरिबोल बाबा महराज, संगीताचार्य पण्डित देवकीनंदन शर्मा, संत सेवानंद ब्रह्मचारी, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, बालशुक पुंडरीक कृष्ण महाराज, डॉ. रामदत्त मिश्र, ब्रज अकादमी के निदेशक डॉ. बी.बी. माहेश्वरी, पिंकी माथुर एवं पण्डित ईश्वरचंद्र रावत आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन प्रमुख शिक्षाविद् डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा ने किया।

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