डॉ.बचन सिंह सिकरवार

हाल में पश्चिमी अफ्रीकी देश माली के पूर्वोत्तर इलाके में मेनका क्षेत्र में स्थित सेना की एक चौकी पर गत 1नवम्बर को आतंकवादियों ने एक बार फिर हमला किया, जिसमें 53 सैनिक मारे गए हैं। इससे पहले भी बुर्किना फासो की सीमा निकट आतंकवादियों ने हमला किया था,तब भी उसके 40 सैनिकों की मार गए थ। इस हमले को माली की सेना पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। आतंकवादियों ने यह हमला पड़ोसी देश नाइजर की सीमा के पास स्थित सैन्य चौकी पर किया है। इसमें सैनिकों के साथ-साथ एक नागरिक की भी जान गई। माली पर दहशतगर्द संगठन ‘अलकायदा’ से जुड़े दहशतगर्दों ने सन् 2012 में उत्तरी माली पर कब्जा कर लिया था। माली पश्चिमी अफ्रीकी का ऐसा देश है,जिसका कोई भी भाग समुद्र से नहीं जुड़ा है। इसके उत्तर में अल्जीरिया और पूर्व बर्किना फासो तथा नाइजर है। इसके पश्चिम दक्षिण में मारितानिया और दक्षिण में कोटे डी आइवरी है।माली का क्षेत्रफल-1,2,40,192 वर्ग किलोमीटर और आबादी-1,45,17,176 से

अधिक है,जो इस्लाम तथा कबायली धर्म की अनुयायी है।इस देश की शासकीय भाषा-फ्रेंच तथा लोगों द्वारा बम्बारा और दूसरी अफ्रीकी भाषाएँ बोली जाती हैं। माली की राजधानी -बमाको और मुद्रा- माली फ्रैंक है। यह देश 22सितम्बर, सन् 1960 फ्रांस की दासता से मुक्त हुआ तथा स्वयं को स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया। प्राकृतिक सम्पदा की दृष्टि से माली निर्धन है। केवल करीब 20प्रतिशत भूमि पर खेती होती है। मुख्य फसलें चावल, ज्वार-बाजरा तथा मूंगफली है। पशु पालन महत्त्वपूर्ण उद्यम है और चमड़े तथा खालों का उद्योग प्रमुख है। नदियों में मछली पकड़ने का काम बड़े पैमाने पर होता है और सूखी मछलियों को खूब निर्यात किया जाता है। माली पर आतंकवादियों के हमले से स्पष्ट है कि इन दहशतगर्दों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जहाँ वे दहशत फैला रहे वह इस्लामिक मुल्क है या नहीं। उन्हें तथाकथित अपने मकसद से मतलब है,इसके लिए वे किसी की जान ले सकते हैं। ऐसे दहशतगर्दों से माली को कब छुटकारा मिलेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।




















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