वृन्दावन। छटीकरा रोड़ पर श्रीकृष्ण शरणम कालोनी स्थित ब्रज सेवा संस्थान के कार्यालय में कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली, जगद्गुरु निम्बार्काचार्य के प्राकट्योत्स्व, संतप्रवर गणेश दास “भक्तमाली” जयंती एवं चैतन्य महाप्रभु के वृन्दावन आगमन के उपलक्ष्य में सन्तविद्वत संगोष्ठी का आयोजन सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए ब्रज सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा का सनातन धर्म में अत्यधिक महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के ही दिन भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से एक प्रथम अवतार मत्स्य अवतार हुआ था। जिन्होंने की वेदों की रक्षा एवं महाप्रलय में मनु की नाव की रक्षा की थी। आज के ही दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। इसीलिए भगवान शिव को त्रिपुरारी एवं कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए बयाना(भरतपुर) से आये रघुनाथ मन्दिर के महन्त अवधेश दास जी महाराज ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा के ही दिन तुलसी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसलिए आज के दिन तुलसी पूजा का विशेष विधान है।
संस्थान के उपाध्यक्ष आचार्य विष्णुमोहन नागार्च एवं आचार्य रामदेव चतुर्वेदी ने कहा कि संतप्रवर गणेश दास भक्तमाली धर्म व आध्यात्म जगत की बहुमुल्य निधि थे। उन्होंने श्री नाभादास क्रत “श्रीमद्भक्तमाल” का प्रकाशन कराकर लोक कल्याण का बहुत बड़ा कार्य किया है। आचार्य बद्रीश व सतेंद्र जोशी ने कहा कि जगद्गुरु निम्बार्काचार्य जी महाराज का आज 5117वां प्राकट्य उत्सव है। सुदर्शन चक्र के अवतार थे। हमारी उनसे प्रार्थना है कि वो कोरोना महामारी के रोग को सम्पूर्ण विश्व से समाप्त कर प्राणियों को भय मुक्त करें।
राधारमण मन्दिर के सेवायत आचार्य चन्दन गोस्वामी व बदरीनाथ मन्दिर के पुरोहित कमलनयन जी महाराज ने कहा की चेतन्य महाप्रभु कलयुग में धर्म व आध्यात्म के सच्चे मार्गदर्शक थे। उन्होंने श्रीधाम वृन्दावन की खोज करके असंख्य व्यक्तयों का कल्याण किया।इस अवसर पर पण्डित बिहारीलाल वशिष्ठ, आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, राधाकांत शर्मा, आचार्य जयकिशोर गोस्वामी, डॉ. सुयश त्रिपाठी, वसुधा सहचरि, सन्दीप अरोड़ा, हंसराज अरोड़ा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किया।





















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